न जानता था कि अपने यूपी वाले योगी जी को ये दिन भी देखने पड़ेंगे। पहले, मोदी जी वाले चुनाव आयोग ने सर-सर करते-करते, करीब चार करोड़ वोट काट दिए। खाई खोदनी थी दुश्मनों के लिए, पर उसमें दोस्तों के भी गिरने का इंतजाम कर दिया। वह तो गनीमत रही कि संघ वालों ने ठीक टैम पर आखिरी सूची में पक्के विरोधियों के वोट कटवाने और पक्के भगतों के वोट जुड़वाने का बीड़ा उठा लिया, वर्ना आने वाले चुनाव के टैम में न जाने क्या गत बनती? सच पूछिए कि अब भी कहां पक्का है कि यूपी में हरियाणा, महाराष्टÑ की तरह, इसका पक्का इंतजाम हो भी गया है कि वोटर वही जो योगी-मोदी मन भाए। दुश्मन न करे, दोस्तों ने वो काम किया है, भगवा का नाम बदनाम किया है।
माघ मेला में अविमुक्तेश्वरानंद ने हंगामा खड़ा कर दिया। योगी की पुलिस ने विशेष स्नान के लिए बढ़ने से शंकराचार्य की पालकी को जरा सा रोक क्या दिया और शंकराचार्य के चेलों को जरा सा ठोक-पीटकर इसकी याद क्या दिला दी कि राम-राज्य हो तो और हिंदू राज्य हो तो, यूपी में राज योगी का ही चलेगा, बस शंकराचार्य ने बवाल कर दिया। मेला प्रशासन ने शंकराचार्य होने के कागज दिखाने के लिए कहा तो, जनाब और भडक गए और अनशन शुरू कर दिया। अब सुना है कि बिना नहाए शंकराचार्य दल-बल के साथ लौट गए हैं।
बेशक, यूपी में योगी जी के भक्त भी कम नहीं है। अगर एक सरकारी अधिकारी ने शंकराचार्य के साथ बदसलूकी के विरोध में इस्तीफा दिया, तो एक जीएसटी डिप्टी कमिश्नर, प्रशांत कुमार ने योगी जी के सम्मान की रक्षा के लिए भी इस्तीफा देने का एलान किया। पर यहां भी दुर्भाग्य ने पीछा नहीं छोड़। प्रशांत कुमार के भाई ने ही उनके कागजों में फजीर्वाड़े का मुद्दा उछाल दिया। लगी-लगाई नौकरी की माया भी हाथ से खिसक चली और योगी जी के कृपा के राम का मिलना भी मुश्किल हो गया।
लौट के बुद्धू घर को आए, इस्तीफा वापस लेकर नौकरी बचाए। और अब, ये इलाहाबाद हाई कोर्ट के जनाब अरुण कुमार सिंह देशवाल भी! नाम ङ्क्षसह वाला और काम…? एक तो भाई लोग हाई कोर्ट का नाम इलाहाबाद ही रखे हुए हैं, प्रयागराज करने ही नहीं दे रहे हैं। ऊपर से जज साहब चुनौती दे रहे हैं कि यूपी को पुलिस राज्य नहीं बनने देंगे। वह भी सिर्फ इसलिए कि पुलिस के अधिकारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आदि न्यायाधीशों पर अपने मन मुताबिक फैसले देने के लिए दबाव डालते हैं।
योगी जी-मोदी जी के डबल इंजनिया राज में, एन्काउंटर के नाम पर पूरे 11,000 संदिग्धों को, आपरेशन लंगड़ा चलाकर लंगड़ा किया गया है। अब बताइए, जो रामलला को लाए हैं, उन योगी जी को भी क्या किसी को सजा देने के लिए, अदालतों का मुंह देखना पड़ा चाहिए? क्या अदालतें, सनातनी योगी से भी ऊपर हो जाएंगी? यही अगर राम राज्य है तो ऐसा झूठा राम राज्य योगी जी को नहीं चाहिए। क्या राम राज्य में, राम की इच्छा या आज्ञा से भी ऊपर कोई था? खैर! योगी जी फिकर नॉट! आप बस हिंदू-मुसलमान का जाप करते रहना! योगी जी आप संघर्ष करो, भक्त सदा आपके साथ रहेंगे।

