- अपने दावों पर खरी नहीं उतरी सरकारें
- पिछले साल मंडल में 79 हजार पंजीकृत बेरोजगारों को नहीं मिली नौकरी
- सेवायोजन कार्यालय की ओर से प्रत्येक माह लगाये जाते हैं रोजगार मेले
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: युवाओं को रोजगार दिये जाने के नाम पर खूब वोट मांगा जा रहा है। चुनाव का समय चल रहा है और हर कोई पार्टी यहां युवाओं को लुभाने का प्रयास कर रही है। हर कीमत पर उन्हें रोजगार देने की बात कर रही है। यह दावे हर बार चुनाव आते ही किये जाते हैं, लेकिन इन दावों की हकीकत रोजगार कार्यालय के आंकड़े खोलते नजर आ रहे हैं। यहां मेरठ मंडल की बात करें तो वर्ष 2021 में सौ से अधिक रोजगार मेले लगे बावजूद इसके यहां पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या में हजारों बेरोजगार अभी भी शामिल हैं।
कोई भी युवा हो वह केवल एक रोजगार की आशा सरकार से लगाये रखता है। सरकार बनने से पहले उनके नेता बड़े दावे करते हैं कि युवाओं को रोजगार दिया जायेगा, लेकिन हकीकत इससे कोसो दूर रहती है। मेरठ की ही बात करें तो यहां रोजगार मेले तो खूब लगे, लेकिन युवाओं को रोजगार देने का प्रतिषत काफी कर रहा।
पूरे मेरठ मंडल में जनवरी 2021 से लेकर अक्टूबर नवंबर माह तक 108 रोजगार मेले लगाये गये। इन रोजगार मेलों 9956 युवाओं को रोजगार मिला, लेकिन फिर भी 79,184 बेरोजगार रह गये। इन मेलों में 42 हजार 356 युवाओं ने भाग लिया। मतलब यहां 20 से 25 फीसदी युवाओं को ही बीते साल में रोजगार मिल पाया।
यही हाल हर साल का होता है। सरकार के दावों की पोल रोजगार कार्यालय के यह आंकड़े खोलते नजर आ रहे हैं। क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार 108 रोजगार मेलों में कुल 768 कंपनियां शामिल हुई और 42366 अभ्यर्थियों ने भाग लिया। मंडल की बात की जाये तो यहां 79,184 बेरोजगार हैं।
वहीं, इस संबंध में सहायक निदेशक, क्षेत्रीय सेवायोजन विभाग, शशि भूषण उपाध्याय का कहना है कि सेवायोजन विभाग बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के लिये लगातार प्रयास कर रोजगार मेलों का आयोजर कर रहा है। इसका लाभ भी युवाओं को मिल रहा है। कंपनियों में युवाओ को उनकी योग्यता के आधार पर चुना जाता है।
युवाओं को नहीं मिलती सही सेलरी
यहां प्लेसमेंट कंपनियों की बात करें तो युवाओं का इन मेले में इंटरव्यू होता है और उसके बाद उन्हे रोजगार दिया जाता है। इन सभी मेले में निजी कंपनियों के प्रतिनिधि भाग लेते हैं। जो छात्रों के कागजात चेक करने के बाद उनकी पढ़ाई के अनुसार उनकी नौकरी तय करते हैं, लेकिन इन रोजगार मेलों में मिलने वाली नौकरी से सेलरी काफी कम होती है।
जिस कारण युवा उनकी ओर आकर्षित नहीं हो पाते और सभी युवाओं को नौकरी प्राप्त नहीं होती। अगर बिना पंजीकृत रोजगारों की बात की जाये तो उनकी संख्या यहां लाखों में है, लेकिन रोजगार कार्यालय में केवल निजी कंपनियों को मेलों में बुलाया जाता है। जिस कारण युवा शामिल नहीं होते।
उधर, सरकारी नौकरियों को लेकर युवाओं का काफी रुझान रहता है, लेकिन रोजगार कार्यालय की ओर से सरकारी नौकरियों के लिये कोई सहायत प्राप्त नहीं होती केवल उसका रजिस्ट्रेशन नंबर ही कहीं कहीं पर दिखाना होता है।

