Saturday, February 14, 2026
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एआरटीओ प्रशासन बना सफेद हाथी

  • निजी स्कूलों की लापरवाही उजागर होने पर भी एआरटीओ मौन
  • कार्रवाई करने को किसी शुभ मुहूर्त के इंतजार में एआरटीओ

जनवाणी संवाददाता  |

मुजफ्फरनगर: जनपद भर में हजारों की संख्या में संचालित हो रहे निजी स्कूलों की प्रतिदिन लापरवाही उजागर हो रही है। एक और जहां निजी स्कूल संचालकों के द्वारा मनमाने तरीके से फीस वसूली जा रही है,वहीं दूसरी ओर सरकार को निजी स्कूल राजस्व का चूना लगाने में कोई भी कसर नही छोड़ रहे हैं। चंद रुपयों के लालच में निजी स्कूल संचालकों के द्वारा नन्हे-मुन्ने बच्चों की जिंदगी को दांव पर लगाने का काम किया जा रहा है। स्कूल तक लाने व ले जाने के लिए स्कूल संचालकों के द्वारा ई-रिक्शा को स्कूली वाहन के रूप में रखा हुआ है। ई रिक्शा के माध्यम से बच्चों को भूसे की तरह ई-रिक्शा में बैठाकर घर से स्कूल एवं स्कूल से घर लाने व ले जाने का कार्य किया जा रहा है।

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स्कूली छात्र एवं छात्राओं से खचाखच भरी ई-रिक्शा को शहर के व्यस्तम बाजार एवं सड़क से भी गुजरना पड़ता है, जिसके चलते कोई भी अनहोनी होने का डर लगा रहता है मगर स्कूल संचालकों की आंखों पर लालच की पट्टी बंदी होने के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा हैं। ऐसा नहीं है कि एआरटीओ प्रशासन इन सभी बातों से अनजान है,मगर तिजोरी की पहरेदारी ने एआरटीओं प्रशासन के पैरों में बंदिशों की बेड़िओं ने जकडा हुआ हैं। या फिर यूं कहिए कि निजी स्कूलों के द्वारा बरती जा रही लापरवाही के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए किसी विद्वान पंडित के द्वारा मुहूर्त निकलवाने का इंतजार किया जा रहा है।

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बता दें कि एआरटीओ प्रशासन सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में गत 23 अप्रैल से जनपद भर में निजी स्कूलों से संचालित वाहनों के मानकों की गहनता से चेकिंग करने खामिया मिलने पर कार्यवाही किए जाने के लिए अभियान चलाया हुआ है। बावजूद इसके स्कूल संचालकों के द्वारा कोई किसी प्रकार का यातायात नियमों का पालन नही किया जा रहा हैं।

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एआरटीओ प्रशासन सुरेंद्र सिंह के द्वारा जनपद में संचालित हो रहे निजी स्कूलों के विरुद्ध छेड़े गए अभियान के अंतर्गत लापरवाही बरत रहे निजी स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने के दावे हवा हवाई होते नजर आ रहे हैं। एक और जहां एआरटीओ प्रशासन प्रतिदिन जनपद के निजी स्कूलों से संचालित होने वाले वाहनों के मानकों की चेकिंग कर रहे हैं,वहीं दूसरी ओर दर्जनों स्कूली वाहन बिना फिटनेस के ही सड़कों पर दौड़ रहे।

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पीएस पब्लिक स्कूल यातायात नियमों को ताक पर रख कर रहा उलंघन

जनपद के नई मंडी थाना क्षेत्र के अंतर्गत गांव अलमासपुर से संचालित निजी स्कूल पी एस पब्लिक स्कूल के द्वारा संचालित हो रही स्कूल बसों की फिटनेस गत जनवरी में समाप्त हो गयी थी,बावजूद इसके स्कूल की बस यातायात नियमों को ताक पर रख कर सड़को पर फर्राटे भर रही हैं। अगर हम स्कूल की बात करे तो पीएस पब्लिक स्कूल नर्सरी से लेकर 8वी कक्षा तक हैं जिसमें करीब 250 से 300 छात्र व छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। वही स्कूल संचालक के द्वारा नर्सरी के एक बच्चे से दाखले एवं पुरे वर्ष की फीस सहित12 हजार रूपये लिये जाते हैं।

इसके अलावा बच्चें का पुरा कोर्स भी स्कूल से ही उपलब्ध कराया जाता हैं,जिसकी कीमत 1200 रूपये से लेकर 1400 रूपये तक होती हैं। नसैरी के एक बच्चे से इतनी मोटी रकम पढ़ाई के नाम पर वसूलने के बावजूद भी नियमों को ताक पर रख कर सरकारी राजस्व को हानि पहुंचाने का काम किया जा रहा हैं। एआरटीओ प्रशासन के संज्ञान में ये सभी प्रकार की वारदात होने के बावजूद भी कार्यवाही के नाम पर केवल ओपचारिकता ही  निभाई जा रही हैं। अखबारों की हैड़लाइंस बनने के लिए व कागजी कार्यवाही पुरी करने के लिए हल्का फुलका चेकिं ग अभियान चलाकर टीआरपी व वाहवाही लूटने के अलावा कोई और दूसरा मकसद नही हैं।

पड़ोसी जनपदों में हो रहे हादसों से भी नही ले रहे सबक

स्कूल संचालकों के द्वारा बरती जा रही घोर लापरवाही की भयानक व विभत्स घटनाओं को सुनने के बावजूद भी कोई किसी प्रकार का एक्शन लेने को तैयार नही दिखाई दे रहा एआरटीओ। शुक्रवार को अलग अलग स्थानों पर दो दुर्घटनाएं सामने आई हैं, मगर जनपद में एआरटीओ से अपनी कुर्सी नही छूट रही है। प्रदेश के जिला बागपत में स्कूल के अंदर ही इस 6 वर्षीय मासूम की बस के नीचे कुचलने से दर्दनाक मौत हो गयी।

वही दूसरी और उत्तराखंड में स्कूली बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जाकर अटक गई, गनीमत यह रही कि कोई किसी प्रकार की जान माल की हानि नही हो पाई और सभी छात्र छात्राएं सुरक्षित बचा ली गयी। यह हादसा इतना भयानक था कि देखने वालों के होश फाख्ता हो गए, मगर कहते है कि जाको राखे साईंया मार सकै न कोई, बाल न बांका कर सकै जो जग बैरी होय इस वाक्य को यह हादसा पूरी तरह से चरितार्थ कर रहा हैं। हादसे को देखने व सुनने के बाद किसी की भी सांसे अटक जाती।

एआरटीओ प्रशासन सुरेंद्र सिंह पड़ोसी जनपदों व राज्यों में हो रहे भयानक हादसों से भी शिक्षा नही ले पा रहे हैं। एआरटीओ से स्कूलों द्वारा संचालित की जा रही बसों के मानकों की चैकिंग कर व लापरवाही बरते जाने पर सख्त कार्यवाही करने के सवाल पर केवल एक ही जवाब मिलता हैं कि हमारी टीम पूरी मेहनत कर रही हैं। एआरटीओ की टीम के द्वारा की जा रही कड़ी महेनत का रंग यातायात नियमों का उलंघन कर सडको पर फर्राटे भर्ती पीले कलर में स्कूली बसो की स्पीड पर ब्रेक लगाने में नाकाम साबित होती दिखाई दे रही हैं।

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