- मार्च में बढ़े तापमान से बागवानों को लगा झटका, अच्छी फसल नहीं
वरिष्ठ संवाददाता |
सहारनपुर: आम के लिहाज से सहारनपुर की खास पहचान रही है। बेहट की फल पट्टी के तो क्या कहने। लेकिन, इस बार हालात उलट हैं। ऐसा लगता है कि सात समंदर पार तक अपने लजीज स्वाद के लिए खास पहचान रखने वाला सहारनपुर का आम उत्पादन अबके घटेगा। दरअसल, मार्च में अचानक बढ़ा तापमान जनपद में आम के उत्पादन पर भारी पड़ रहा है। इसके चलते जनपद में आम का उत्पादन 20 से 30 प्रतिशत तक कम होने की संभावना है। इससे आम के बागवान से लेकर ठेकेदार तक टेंशन में हैं। इसका सबसे अधिक असर बेहट क्षेत्र में देखने को मिल रहा है।
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जनपद सहारनपुर का आम विदेशों तक में बड़े पैमाने पर निर्यात होता रहा है। फ्रांस, जर्मनी, जापान जैसे देशों में सहारनपुर के आम आम की धूम रहती है। लेकिन, इस बार आम उत्पादन प्रभावित हुआ है। दरअसल, औसत पैदावार 11.50 टन प्रति हेक्टेयर है। इस बार आम के बागों में बढ़िया बौर आया था, लेकिन मार्च में मौसम अचानक गर्म हो गया। करीब 35 से 37 डिग्री सेल्सियस तापमान होने से आम का बौर बुरी तरह से प्रभावित हुआ। गर्मी के प्रभाव से न सिर्फ बौर गिर गया|
बल्कि आम के फल की सेटिंग भी कम हुई। इसके चलते आम के उत्पादन में 25 प्रतिशत तक कमी होने की संभावना है। जनपद के बेहट क्षेत्र में इसका असर अधिक दिखाई दे रहा है। बागवानों का कहना है कि बागों की स्थिति को देखकर अब बाग के ठेकेदार भी पीछे हटने लगे हैं। बता दें कि गत वर्षों की अपेक्षा इस बार आम की फसल बहुत कम है। मार्च- अप्रैल में हुई तेज गर्मी से आम की फसल पर विपरीत असर पड़ा है। रही सही कसर भुनगा कीट के प्रकोप और आंधी ने पूरी कर दी है।
गत वर्ष की अपेक्षा इस बार आम की फसल 25 प्रतिशत तक कम है। मिर्जापुर के बागवान अशोक सैनी का कहना है कि हमारे बाग में इस बार मात्र 50 फीसदी ही आम की फसल है। आम के बौर के समय तेज गर्म मौसम और कुछ समय बाद ही ठंडा हो जाने से आम की फसल का उत्पादन प्रभावित हुआ है। जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार का कहना है कि इस बार मार्च में 35 से 37 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा है।
जिन बागों में उस समय सिंचाई नहीं हुई थी उनमें गर्मी से बौर प्रभावित हुआ, साथ ही बौर में आम भी कम बैठा। इसके अलावा भुनगा कीट का प्रकोप भी इस बार अधिक रहा है। इसका सबसे अधिक असर बेहट क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। इस बार जनपद में आम के उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आने की आशंका है। अब कुछ भी हो किंतु आम का निर्यात इस बार कम ही रहेगा। बागवान परेशान हैं। उनके घाटा सहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

