- आज नगरायुक्त पद का चार्ज संभालेंगे अमित पाल शर्मा
- आसान नहीं होगी निगम को संभालने की राह
- निकाय चुनाव का समय भी नजदीक, दर्जनों प्रोजेक्ट बजट न होने से अटके
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगरायुक्त अमित पाल शर्मा आज नगर निगम में पदाभार संभाल सकते हैं। उनके पदभार संभालने के बाद यहां कई चुनौतियां उनके सामने होंगी। शहर के कई बड़े प्रोजेक्ट बजट के अभाव के कारण रुके हैं और कई टेंडर जो निगम को राजस्व की प्राप्ति कराते हैं। वह भी इस बार अभी तक नहीं हो पाए हैं। ऊपर से निगम कार्यकारिणी का चुनाव भी सिर पर है। दिसंबर में निगम पार्षदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है।
उससे पहले बोर्ड बैठक भी होनी है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले नगरायुक्त अमित पाल के लिये निगम का सफर आसान नहीं होने वाला। कई कार्यों को कराने की चुनौतियां उनके सामने होंगी और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को भी गति देने का काम किया जाना है।
आने वाले नगरायुक्त अमित पाल शर्मा के लिये मेरठ नगर निगम का कार्यकाल चुनौतियों भरा होने वाला है। क्योंकि पिछले एक माह से भी अधिक समय से विभाग में नगरायुक्त का पद खाली था। शहर की आबादी 26 लाख से अधिक है और दर्जनों विकास संबंधित प्रोजेक्ट अधर में हैं। जोकि नगरायुक्त के न होने के कारण लटके पड़े थे। ऊपर से कई टेंडर प्रक्रिया ऐसी हैं जो कि नगरायुक्त की तय कर सकते हैं कि वह टेंडर किस प्रकार से होंगे और वित्तीय वर्ष अप्रैल में खत्म हो गया था।

जिसमें ज्यादात टेंडरों का समय समाप्त हो चुका था। ऐसे में नए टेंडर न होने के कारण निगम को राजस्व की भी होनी हो रही है। अब देखना यह है कि नगरायुक्त किस प्रकार से इन सभी चुनौतियों का सामना करने वाले हैं। काफी इंतजार के बाद मेरठ के नगरायुक्त पद पर नियुक्ति हो ही गई है। यहां अमित पाल को नगरायुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अमित पाल वर्तमान में सोनभद्र जिले में मुख्य विकास अधिकारी के पद पर तैनात थे। अब उन्हें यहां मेरठ का नगरायुक्त बनाया गया है। अमित पाल शर्मा 2016 बेंच के आईएएस अफसर हैं।
निगम कार्यकारिणी चुनाव सिर पर
इस बार निगम कार्यकारिणी का भी कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है और अभी तक मात्र दो या तीन बैठकें हो पार्इं हैं। जोकि सही प्रकार से हुई अन्यथा आधे से ज्यादा बैठकें हंगामे की भेंट चढ़ गर्इं थी। अब पार्षदों का समय भी खत्म होने वाला है और चुनावी शतरंज बिछ चुकी है। सभी उम्मीदवार अपनी तैयारी में लग चुके हैं और सभी राजनीतिक दलों की ओर से भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
देखना यह है कि नगरायुक्त जब आज चार्ज लेंगे तो बोर्ड बैठक कब होगी? क्योंकि बीती बोर्ड बैठक की बात करें तो उसे हुए महीनों बीत चुके हैं, निगम में बोर्ड बैठक नहीं हुई है। अभी तक 90 वार्डों में से आधे से ज्यादा वार्डों में कोई कार्य नहीं हो पाया है। ऐसे में पार्षदों और अधिकारियों सभी के सामने विकास कार्य कराना चुनौती होगी।
कई प्रोजेक्ट बजट के अभाव में लटके
नगरायुक्त पद संभालते ही अमित पाल शर्मा के सामने सबसे बड़ी चुनौती शहर के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर होगी। उनके सामने कई बड़े कार्य ऐसे होंगे जिन्हें पूरा करने के बाद मेरठ स्मार्ट सिटी की सूची में टॉप में पहुंच सकता है। यहां कई मार्गों को स्मार्ट मार्ग बनाये जाने का कार्य किया जा रहा है।
जिसकी शुरुआत गांधी आश्रम से लेकर तेजगढ़ी चौराहे तक बनाये जाने से होनी है, लेकिन अभी भी इसका बजट नहीं आ पाया है। यही हाल हापुड़ रोड का भी है। इसके अलावा शहर में मल्टीलेवल पार्किंग, घर-घर तक पानी पहुंचाना, सीवर लाइन बिछाये जाना यह सभी स्मार्ट सिटी के तहत आते हैं। विभागीय अधिकारियों की माने तो यह प्रोजेक्ट पूरे किये जाने हैं और इनके लिये खर्चे का प्रस्ताव भी बनाकर तैयार कर भेजा जाना है।
अब बस यहां नगरायुक्त के पदभार संभाले जाने का इंतजार है। फिर उनके सामने ही यह रिपोर्ट रखी जाएंगी। जिसके बाद प्रस्ताव शासन तक पहुंचेंगे। शहर में मल्टीलेवल पार्किंग शहरवासियों के लिये बड़ी जरूरत है। यहां कई बाजार छोटी और तंग गलियों में हैं। जिस कारण यहां वाहनों को अंदर ले जाना मना है।
शहर का सराफा बाजार और वैली बाजार यहां ऐसी ही जगहों पर मौजूद है। पिछले कई वर्षों से यहां सराफा एसोसिएशन व अन्य व्यापार संगठन मल्टीलेवल पार्किंग की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन उनकी मांग अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। कई बार अधिकारियों की ओर से जगह भी देखी गई, लेकिन यह कार्य आगे नहीं बढ़ सका। अब व्यापारियों को उम्मीद है कि वह अपनी बात को नये नगरायुक्त के सामने रखेंगे और इस पर कार्य कराएंगे। मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन ने भी यह मांग नगरायुक्त के सामने रखने की बात कही है।
ये प्रोजेक्ट अधर में
- सभी बड़े नालों के ऊपर पार्किंग बनाये जाने का प्रोजेक्ट।
- गांधी आश्रम से तेजगढ़ी तक स्मार्ट रोड़ बनाया जाना।
- मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण सालों से शुरू नहीं हुआ।
- गांवड़ी और मंगतपुरा में कूड़ा निस्तारण प्लांट का लगना।
- लोहिया नगर में कूड़ा निस्तारण प्लांट की मात्रा को बढ़ाया जाना।
- सभी वार्डों में सीवर लाइन का बिछाया जाना।
- घर-घर तक पानी की लाइन पहुंचाना।

