जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: औरंगाबाद का नाम संभाजीनगर किए जाने का मामला ठंडा होने का नाम नहीं ले रहा है। AIMIM सांसद इम्तियाज जलील ने इस फैसले पर फिर से निशाना साधा है। उन्होंने कहा, अगर एक शहर का नाम बदला जाता है, तो इसके लिए भारी मात्रा में पैसे की आवश्यकता होती है।
इम्तियाज जलील ने कहा, एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आप एक छोटे शहर का नाम बदलना चाहते हैं, तो लगभग ₹500 करोड़ की जरूरत होगी। दिल्ली के एक अधिकारी ने मुझे बताया कि औरंगाबाद जैसे शहर के लिए 1,000 करोड़ रुपये तक की आवश्यकता हो सकती है। यह सिर्फ सरकारी दस्तावेजों और पत्राचार को बदलने के लिए है। यह टैक्स का पैसा है, जो आपका और मेरा है।
एआईएमआईएम सांसद ने कहा, अगर मेरे पास एक दुकान है और मैं उसे बदलना चाहता हूं तो नया आधार कार्ड बनवाना होगा। इसके लिए आपको लाइन में लगना होगा। उद्धव ठाकरे व शरद पवार जैसे नेता आपकी मदद के लिए आगे नहीं आएंगे।
इससे पहले भी एमआईएमआईएम सांसद औरंगाबाद का नाम बदले जाने को लेकर उद्धव ठाकरे सरकार की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने कहा था, सरकार को बचाने के लिए औरंगाबाद का नाम बदला गया था। कुछ लोग हैं जो हर चीज को सांप्रदायिक रंग में रंगना चाहते हैं। यह कोई मुद्दा नहीं है, जो हिंदुओं और मुसलमानों से जुड़ा है। एक व्यक्ति अक्सर खुद की पहचान एक शहर से करता है।
इम्तियाज जलील ने कहा, औरंगाबाद का नाम बदले जाने के सवाल पर एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा था कि उन्हें फैसले के बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, शरद पवार का बयान पूरी तरह से बचकाना था। दरअसल, महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन से पहले उद्धव सरकार ने कैबिनेट बैठक बुलाकर औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर और उस्मानाबाद धाराशिव नगर करने का प्रस्ताव पास किया था। उनके इन फैसलों को सरकार बचाने की आखिरी कोशिश के रूप में देखा गया था।

