Sunday, March 22, 2026
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निगम में हो रहे भ्रष्टाचार का मेयर ने मांगा ब्योरा

  • निगम की लाज रख रहीं मेयर, आखिर निगम में भ्रष्टाचार को आंखें मूंदकर क्यों किया जा रहा समर्थन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पांच साल से नगर निगम की सुचारू चल रही कार्य प्रणाली जहां मेयर सुनीता वर्मा ने विकास कार्यों को तरजीह दी, वहीं अपने कार्यकाल की अंतिम बेला पर अपने ही नगर निगम पर यकायक भ्रष्टाचार की आंधी को वह भी नहीं झेल पाई तथा मजबूरी वश या यूं कहें कि निगम की लाज रखने पर मेयर को भी नगर निगम के मुखिया को पत्र लिखकर सवाल पूछना पड़ा कि आखिर निगम में भ्रष्टाचार को आंख मूंद कर क्यों समर्थन किया जा रहा हैं?

मेयर ने नगरायुक्त अमित पाल शर्मा को कुछ पत्र प्रेषित किये हैं, जिसमें गंभीर आरोप लगाये हैं। जो आरोप लगाये गए हैं, उनमें मुख्य रूप से हाल ही में रिश्वत लेते हुए रंग हाथ गिरफ्तार किये गए नवल राघव कर निरीक्षक को उल्लेखित करते हुए सवाल खड़ा किया कि जब बोर्ड बैठक में सचेत कर दिया गया था कि निगम कर्मियों द्वारा गृहकर के बिल अनाप-शनाप बढ़ाकर भेजे जा रहे हैं तथा रिश्वत लेकर बाद में इन बिलों को कम कर दिया जाता हैं,

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जिससे नगर निगम की बड़ी बदनामी होती हैंं। इस पर अंकुश लगाया जाए, परन्तु अधिकारियों द्वारा इस संदर्भ में बैठक में उठाये गए बिन्दू के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई तथा भ्रष्टाचार निवारण विभाग द्वारा निगम कर्मी को रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने से विभाग की तो बदनामी हुई ही है, साथ ही उच्च अधिकारियों की संलिप्ता अथवा मौन स्वीकृति स्पष्ट होती हैं, यह बड़ा ही खेद का विषय हैं।

एक अन्य पत्र में मेयर सुनीता वर्मा द्वारा भिन्न-भिन्न समय में चुनाव प्रक्रिया के दौरान तथा समय-समय पर निगम द्वारा चलाये गए होर्डिंग हटाओ अभियान में शहर में विभिन्न भागों से होर्डिंग्स आदि का जो लोहा (स्क्रेप) निगम गोदाम में जमा किया जाता हैं, उसका क्या किया गया तथा निगम कर्मियों द्वारा अवैध रूप से करोड़ों का स्क्रेप बेच दिया गया। उस पर जांच बैठाई गयी, लेकिन उक्त जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई।

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पर्याप्त सबूतों के बाद भी ऐसे भ्रष्ट कर्मियों द्वारा बेचे गए स्क्रेप के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा पत्र में मुख्य बिंदू वार्ड 35 में 300 मीटर सड़क का निर्माण हुआ, जबकि 600 मीटर सड़क निर्माण करने का बिल पेश कर दिया गया। ये प्रकरण मीडिया की सुर्खियों में रहा था तथा निगम की कार्यप्रणाली की भी खूब किरकिरी हुई, परन्तु निगम अधिकारियों द्वारा इस कृत्य में भी सांसद व विधायकों द्वारा विरोध किये जाने के बावजूद निगम अधिकारियों ने यह जांच भी ठंडे बस्ते में डाल दी तथा एक बड़े भ्रष्टाचार की पृष्ठ भूमि को दबा दिया गया।

एक अन्य पत्र में बोर्ड बैठक में मांगी गई गृहकर के बाकीदारों की एक लाख तक की सूची को ना तो पटल पर रखा और ना ही मेयर कार्यालय में उपलब्ध कराया गया, जो गंभीर वैधानिक त्रुटि हैं। मेयर द्वारा अपने ही विभाग नगर निगम में लचर हो चुकी कार्यप्रणाली तथा भ्रष्टाचार की भेंट हो चुके कार्य संचालन को इंगित करते हुए पत्र लिखकर निगम अधिकारियों को सचेत करना पड़ा जो अपने आप में बड़ा विषय हैं।

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