Tuesday, April 7, 2026
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अवैध मारुति वैन के एंबुलेंस पर सवाल

  • झारखंड, पंजाब, उत्तराखंड समेत यूपी नंबरों पर चल रही अवैध एबुंलेंस
  • मेरठ में 2021 के बाद मारुति वैन का नहीं होता रिन्यूवल

जनवाणी संवाददाता

मेरठ: मरीजों की जान बचाने के नाम पर चलने वाली एबुंलेंस खुद मरीजों की जान जोखिम में डाल रही है। मेडिकल की इमरजेंसी के बाहर मारूती वैन के रूप में मौजूद निजी एबुंलेंसो में ज्यादातर दूसरे राज्यों व यूपी के अन्य जिलों के नंबर वाली गाड़ियां है। मेडिकल प्रशासन इनके खिलाफ पहले भी संबंधित थाने पर शिकायत कर चुका है। बावजूद इसके कुछ दिन बाद यह एबुंलेंस फिर मरीजों की जान जोखिम में डालने के लिए तैयार हैं। इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही हैं।

गैर राज्यों के नंबर वाली गाड़िया शक के दायरे में

शनिवार को मेडिकल इमरजेंसी के बाहर बड़ी संख्या में निजी एबुंलेंस खड़ी नजर आई। जबकि कुछ दिन पहले ही मेडिकल के प्रिंसपल ने इन निजी एबुंलेंसों की शिकायत संबंधित थाने की पुलिस से की थी। जिसके बाद पुलिस ने अभियान चलाकर निजी एबुंलेंसो के चालकों को खदेड़ा था, लेकिन अब फिर वहीं स्थिति पैदा हो गई है। इनमें झारखण्ड, पंजाब, उत्तराखंड व यूपी के दूसरे जिलों की एबुंलेंसो की संख्या ज्यादा है।

इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को बनाती है शिकार

निजी एबुंलेंसो का सबसे साफ्ट टारगेट मेडिकल इमरजेंसी में भर्ती मरीज होते है। गंभीर मरीज के परिजन अपने मरीज को किसी दूसरे अस्पताल में भर्ती कराने ले जाते है तो इन एबुंलेंस के चालक मरीज के तीमारदारों से मनचाहा पैसा वसूलते है। इनके लिए कोई तय कीमत नहीं होती है। जबकि दिल्ली तक जाने के लिए भी यह तैयार रहती है।

चालक कमीशन के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों में कराते है भर्ती

निजी एबुंलेंसो के चालकों की सैटिंग निजी अस्पतालों के स्टाफ से होती है। सड़क पर हादसा होने के बाद जिन मरीज को मेडिकल की इमरजेंसी में लाया जाता है लेकिन उन मरीजो को एबुंलेंसो के चालक निजी अस्पताल मे ले जाने की सलाह देते है।

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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार घायलों के तीमारदारों को यह बताया जाता है कि मेडिकल में अच्छी इलाज की सुविधाएं नहीं है। उन्हें भरोसे में लेकर एबुंलेंस चालक ऐसे अस्पतालों में मरीज को भर्ती कराते है जहां उनका कमीशन तय होता है।

एबुंलेंसो की फिटनेस पर भी उठे सवाल

जिन मारूती वेनों को एबुंलेंसो के रूप में चलाया जा रहा है, उनके पास फिटनेस सैर्टिफिकेट नहीं होता। बताया जा रहा है 2021 के बाद से किसी भी वैन का फिटनेस टैस्ट नहीं हो रहा है। क्योंकि यह बंद हो चुकी है। बावजूद इसके यह वाहन धड़ल्ले से सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आते है। ऐसे में यदि कोई हादसा हो जाए तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? यह बड़ा सवाल है।

मेडिकल कैंपस में मारूती वेन के रूप में चलने वाली निजी एबुंलेंस का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। मेडिकल थाने की पुलिस से पहले भी शिकायत की गई थी जिसके बाद इनके खिलाफ कार्रवाई हुई। स्थानीय पुलिस की शह पर ही यह चल रही है, कार्रवाई कराई जाएगी।
-डा. वीडी पांड्ेय, मीडिया प्रभारी, मेडिकल कॉलेज।

इस तरह से मारूती वैन के रूप में चलने वाली एबुंलेस पूरी तरह अवैध है, इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कानूनन इन्हें सीज भी किया जा सकता है। -कुलदीप सिंह, एआरटीओ प्रशासन, मेरठ।

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