
किशोरावस्था की दिशा में बढ़ते बच्चों में हार्मोनल परिवर्तन की आयु 12 वर्ष के आसपास शुरू होती थी, तब किन्हीं बच्चों में ‘एनिमल इन्सटिंकट्स’ प्रबल हो जाया करते थे। यह बच्चे गुस्सैल, आक्रामक, चिड़चिड़े, आक्रोश से भरे और आत्मनियंत्रण में कमजोर हुआ होते थे। मगर अभी जो मनोवैज्ञानिकों के निष्कर्ष हैं, उसके अनुसार अब यह झंझावात की अवस्था डेढ़-दो वर्ष पहले ही आने लगी है। इसका कारण है-प्रकृति से कटा कृत्रिम जीवन, भौतिकवाद से उपजी जीवनशैली, रेडीमेड खानपान, एकल परिवारों के दौर में बच्चों में बढ़ता अकेलापन और सूचना विस्फोट। यह अपना अधिकतर समय टीवी के आगे या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिता रहे हैं। निम्नवर्ग के बच्चों के परिवार में स्मार्टफोन भले ही न हो, किंतु यह भी अपने मध्यवर्ग के मित्रों के बीच मोबाइल में उपलब्ध वयस्क कंटेन्ट या क्राइम थ्रिलर का मजा लेने में पीछे नहीं रहते हैं।