Thursday, February 12, 2026
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ई-रिक्शा की कमाई से जल रहा 1.5 लाख घरों में चूल्हा

  • चार लाख की जिंदगी में खुशियां घोल रहा इकोफ्रेंडली तिपहिया
  • किसी की नौकरी छूटी, किसी की दुकान बंद, ई-रिक्शा ने बनाया आत्मनिर्भर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एनएच-58 के डुंगरावली निवासी विकास पहले सुपरटेक में सर्विस देने वाली सिक्योरिटी कंपनी में काम करते थे। नौकरी गई तो वेदव्यासपुरी में एक प्रकाशन में काम किया। वहां से छंटनी हुई तो ई-रिक्शा खरीदा। बीते दो साल से इसी की कमाई से घर चल रहा है।

कुछ ऐसी ही कहानी रुडकी रोड स्थित एकता नगर निवासी नरेश कुमार महामना की है। पहले वो सब्जी की दुकान चलाते थे। परिवार में बंटवारा हुआ तो कर्ज पर ई-रिक्शा ले लिया। सत्रह महीने से यही गुजारे का साधन है। विकास और नरेश अकेले नहीं हैं। ये कहानी है मेरठ जिले के करीब 1.5 लाख परिवारों की। इनका चूल्हा ई-रिक्शा से चलता है। अगर एक परिवार में औसतन चार सदस्य मानें तो चार लाख से ज्यादा लोगों की जिंदगी में ई-रिक्शा खुशियों के रंग भर रहा है।

जली कोठी निवासी शहजाद कहते हैं कि ई-रिक्शा से ही घर चलता है। जो थोड़ा बहुत समय मिलता है उसमें कुछ पार्ट टाइम मजदूरी भी कर लेते हैं। हालांकि परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में ये आंकड़ा करीब दस हजार है। दरअसल आरटीओ में पंजीकरण की फीस करीब दस हजार रुपये है। पैसा न होने की वजह से अधिकांश लोग ई-रिक्शा का पंजीकरण नहीं करा पाते।

ये है ई-रिक्शा से कमाई का अर्थशास्त्र

एक ई-रिक्शा की कीमत करीब सवा लाख रुपये है। अगर कर्ज लिया है तो किस्तें मिलाकर ये डेढ़ से पौने दो लाख रुपये तक पहुंच जाता है। दस हजार रुपये के आसपास पंजीकरण की फीस है। शहर में अलग अलग स्थानों पर करीब 50 ई-रिक्शा चालकों से बात करने पर पता चला कि सवारी ढोने वालों की प्रतिदिन की कमाई 500 से 700 रुपये प्रतिदिन तक हो जाती है। जो ई-रिक्शा खैर नगर, दाल मंडी, सदर आदि में व्यापारियों का सामान ढोते हैं

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वो 1000 रुपये प्रतिदन तक कमा लेते हैं। स्कूली बच्चों को लाने ले जाने वाले भी इसी के आसपास कमाते हैं। इस तरह ई-रिक्शा चालक औसतन पंद्रह से तीस हजार रुपये महीना तक लोग कमा लेते हैं। कुछ चालकों ने ई-रिक्शा किराये पर लिए हैं। एक ई-रिक्शा का किराया 300 से 500 रुपये प्रतिदिन तक है। किराये वालों की प्रतिदिन की बचत इसी हिसाब से कम हो जाती है।

इकोफ्रेंडली: धुआं न शोर

पर्यावरणविदों के अध्ययन बताते हैं कि वाहनों का धुआं सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाता है। पेट्रोल से चलने वाला एक तिपहिया वाहन एक वर्ष में लगभग 0.005 टन पार्टिकुलेट मैटर 10 (पीएम 10) और एक वर्ष में लगभग 3.72 टन कार्बन डाइआॅक्साइड उत्सर्जित करता है। इस लिहाज ई-रिक्शा बेहद शानदार विकल्प बनकर उभरा है। न धुआं और शोर भी बेहद कम। एक अध्ययन के मुताबिक इसी वजह से वर्तमान में भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में ई-रिक्शा का हिस्सा 83 प्रतिशत है।

गलियों से आसपास के कस्बों तक सफर

ई-रिक्शा शहर की अंदरुनी गलियों में लोगों को उनके घर तक छोड़ते हैं तो वहीं सरधना, मवाना, हस्तिनापुर, किठौर, खरखौदा, परीक्षितगढ़ जैसे कस्बों तक भी जाते हैं। इन कस्बों में अंदर भी ई-रिक्शा चलते हैं। बड़े गांवों में सामान ढोने में भी ई-रिक्शा काम आ रहे हैं।

महिलाओं, बच्चों के लिए सफर आसान

ई-रिक्शा का कॉम्पैक्ट डिजाइन और कम गति लालकुर्ती पैठ, भगत सिंह मार्केट, पीएल शर्मा रोड जैसे भीड़ वाले इलाकों में भी इनकी आवागमन को आसान बनाती है। कामकाजी महिलाएं अपने आॅफिस आने जाने में, बच्चे स्कूल और स्टेडियम के लिए आवागमन में और बुजुर्ग बाजार जाने में इनका खूब इस्तेमाल कर रहे हैं।

चार्जिंग स्टेशन नहीं

सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि शहर में ई-रिक्शा की बैटरी चार्ज करने के स्टेशन नहीं हैं। चालक अपने घरों की बिजली से ही रिचार्ज करते हैं। शहर के कुछ इलाकों में कुछ लोग रात में ई-रिक्शा पार्किंग और चार्जिंग के लिए 50 से 100 रुपये तक वसूलते हैं। बैटरी बदलने में 25,000 रुपये से 28,000 रुपये खर्च आता है। लेड एसिड बैटरियों का वजन आमतौर पर 80 किलोग्राम के करीब होता है, जिससे वाहन का माइलेज कम हो जाता है।

प्रधानमंत्री ई-रिक्शा योजना में मिलता है कर्ज

बैंक इस योजना के लिए लोन उपलब्ध कराती है। मात्र 10 से 15% पैसे जमा करके आप ई-रिक्शा ले सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि रिक्शा की कीमत डेढ़ लाख रुपये है तो आप को 22,000 जमा करना होगा। यदि आपने लोन पर ई रिक्शा लिया है तो आपको लोन चुकाने के लिए 4 साल का समय दिया जाता है।

आठ घंटे चलती है बैटरी

ई-रिक्शा में लीड एसिड बैटरी की बैटरी लाइफ औसतन 1.5 से 3 साल के बीच हो सकती है। एक बार चार्ज करने पर अगर बैटरी लैड की है तो 60 से 70 किमी तक चलता है। वहीं अगर लीथियम बैट्री है तो इसकी क्षमता बढ़ जाती है और ये 70 से 80 किमी तक चलता है। आठ घंटे में चार्ज करने के बाद अगर सवारी फुल मिलती है, तो कुल 55 से 70 किमी चलती है। नहीं तो 80-90 किमी तक खिंच जाता है। जब बैट्री खत्म होने वाला रहता है, तब भी ई-रिक्शा चार किलोमीटर तक चल जाता है।

आरटीओ चला रहा ई-रिक्शा तोड़ो अभियान

परिवहन विभाग ने शहर में होर्डिंग लगाकर बताया है कि अगर बिना पंजीकरण के कोई ई-रिक्शा चलता मिला तो उसे जब्त कर नष्ट कर दिया जाएगा। यातायात पुलिस भी इनके चालान कर रही है। पुलिस लाइन में जब्त किए गए ई-रिक्शा खड़े हैं।

प्रधान देता है 100 रुपये में चालान न होने की गारंटी?

नाम न छापने की शर्त पर कई ई-रिक्शा चालकों ने बताया कि उनका प्रधान प्रतिदिन सौ रुपये वसूलता है और चालान न होने की गारंटी देता है। हालांकि ये किसी ने नहीं बताया कि प्रधान कौन है और ये सौ रुपये प्रति ई-रिक्शा के हिसाब से वसूलकर वह कहां जमा करता है। यह जांच का विषय है कि इसमें कितनी सच्चाई है।

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सरकारी आंकड़ों और हकीकत में चल रहे ई-रिक्शा की संख्या के बीच के अंतर में क्या खेल है। शहर के हित में परिवहन विभाग को ई-रिक्शा चालकों को प्रेरित करके पंजीकरण की व्यवस्था करानी चाहिए ताकि ये चलते भी रहें और लोगों को आवागमन का साधन मिलता रहे।

किसी का नौकर बनने से अच्छा है

मकबरा डिग्गी निवासी वसीम पहले गुजरात के सूरत में कपड़े के थोक व्यापारी के यहां काम करते थे। छह महीने से मेरठ में ई-रिक्शा चलाते हैं। कहते हैं अपने घर हूं। किसी के यहां नौकरी से अच्छा है अपना काम। अभी शादी नहीं हुई सो इस कमाई से खर्च चल जाता है।

10 साल जिंदगी बढ़ गई

जली कोठी निवासी फरमान छह साल से ई-रिक्शा चलाते हैं। पहले रिक्शा चलाते थे। कहते हैं कि उसे शरीर की ताकत से खींचना पड़ता था। गर्मियों में चक्कर तक आ जाते थे। जबसे ई-रिक्शा आया जिंदगी ही बदल गई। ऐसा लगता है कि अब 10 साल जिंदगी बढ़ गई।

न अपनी सुरक्षा न दूसरों की परवाह

मेरठ: वाहन चालकों को सड़कों पर चलने पर यातायात के नियमों का पूर्णत: पालन करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। तमाम ऐसे लोग हैं जो अपनी मर्जी के मालिक हैं उन्हें न तो किसी ट्रेफिक पुलिस का भय है। न ही अपनी सुरक्षा और दूसरों की परवाह। ऐसे लोग अपनी जान जोखिम में डाल ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते देखे जा सकते हैं। जिसका नतीजा यह होता है कि लोग सड़क दुर्घटना में चोटिल होकर अपनी जान तक गंवा देते हैं।

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ट्रैफिक पुलिस है कि अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए लोगों को यातायात के प्रति जागरुक तो करती है, लेकिन साथ साथ आर्थिक दंड के तौर पर चालानी कार्रवाई करने से नहीं चूकती। ट्रैफिक पुलिस ने यातायात का उल्लंघन करने व हेलमेट न लगाने पर हजारों वाहन चालकों का चालान किया है। ट्रैफिक पुलिस ने कुल आठ माह में लाखों रुपये जुर्माने के तौर पर वाहन चालकों से वसूले हैं।

ट्रैफिक पुलिस ने की इस प्रकार चालानी कार्रवाई

वर्ष 2023 में जनवरी माह से लेकर अगस्त तक ट्रैफिक पुलिस ने यातायात का उल्लंघन करने और बिना हेलमेट और बगैर डीएल के चलने वालों पर हजारों की संख्या में चालानी कार्रवाई की है। जो निम्नलिखित है।

बिना हेलमेट चलने वाले 52840

यातायात का उल्लंघन 18505

बिना डीएल के वाहन चलाना या धारा 3/4 उल्लघंन में वाहन चलाना 5770

मौके पर डीएल न दिखाना 11013

अपना डीएल किसी अन्य को दे देना 90

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