Wednesday, February 11, 2026
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श्रमिकों को पकड़ा, भाजपा नेता को नहीं पकड़ पा रही एसटीएफ

एनसीईआरटी घोटाले में कोर्ट में वारंट की अर्जी लगी, सुनवाई सोमवार को

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: 60 करोड़ रुपये के एनसीईआरटी घोटाले में एसटीएफ ने चार श्रमिकों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। जब मुख्य आरोपी भाजपा नेता संजीव गुप्ता और सचिन गुप्ता को पकड़ने की बात आई तो एसटीएफ और परतापुर पुलिस हांफने लगी। वहीं परतापुर पुलिस ने फरार चल रहे चार आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में वारंट की अर्जी लगा दी है। कोर्ट में सुनवाई सोमवार को होगी।

परतापुर के अच्छरौंड़ा और गजरौला से मिली 15 लाख से अधिक किताबों को लेकर पुलिस असमंजस में पड़ी हुई है कि इतना बड़ा स्टाक कहां रखा जाए। इसको लेकर पुलिस दिन भर माथापच्ची करती रही।

शुक्रवार को पुलिस की तरफ से सभी आरोपितों के वारंट लेने के लिए कोर्ट में अर्जी लगा दी है। पुलिस ने दिल्ली स्थित एनसीईआरटी आॅफिस पहुंचकर प्रिंटिंग प्रेस की जानकारी मांगी है। ताकि करोड़ों की अवैध किताबों के धंधे में शामिल अन्य लोगों को आरोपी बनाया जा सके।

एनसीईआरटी ने पुलिस की तरफ से जारी नोटिस में सभी जानकारी देने का भरोसा दिया है। उन्होंने पुलिस की मेल आइडी पर सभी जानकारी भेजने की बात की है। परतापुर पुलिस ने अवैध किताबों का भंडाफोड़ कर भाजपा नेता संजीव गुप्ता और उसके भतीजे सचिन गुप्ता की प्रिंटिंग प्रेस और गोदाम से 364 प्रकार की करोड़ों कीमत की किताब पकड़ी थी।

आठ लोगों को नामजद कर चार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। एसटीएफ और पुलिस फरार चल रहे संजीव गुप्ता, सचिन गुप्ता, विकास त्यीग और नफीश को नहीं पकड़ सकी है।

इंस्पेक्टर आनंद मिश्रा ने बताया कि संजीव और सचिन गुप्ता समेत चारों आरोपितों का कोर्ट से वारंट लेने के लिए अर्जी लगा दी है, जिस पर सोमवार को सुनवाई होनी है। इंस्पेक्टर ने बताया कि पुलिस की एक टीम एनसीईआरटी आॅफिस गई थी।

पुलिस ने एनसीईआरटी से मेरठ में अधिकृत सभी प्रिंटिंग प्रेस का ब्योरा मांगा है। साथ ही कितने दुकानदार एनसीईआरटी के अधिकृत विक्रेता है। किस पेपर मिल से उन्हें पेपर की सप्लाई दी जाती है।

यहां से किताबों की छपाई करवाने के बाद एनसीईआरटी सीधे दुकानदारों को भेजती है, या फिर अपने गोदामों में किताबों का रखा जाता है। पुलिस के सभी सवालों का जवाब एनसीईआरटी के अफसरों ने मेल पर देने को कहा है। परतापुर पुलिस का कहना है कि आरोपी भले ही प्रयागराज हाईकोर्ट के चक्कर काटते रहे, लेकिन उनको जेल तो जाना ही पड़ेगा।

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