Friday, February 13, 2026
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आखिर स्टांप घोटाले का मास्टर माइंड कौन?

  • सालों-साल एक ही अधिवक्ता के जरिये फर्जी स्टांप लगाकर होते रहे जमीन के बैनामे

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: 5000 से बड़े स्टंप के 997 मामले सामने आने के बाद अधिकारी से लेकर रजिस्ट्री विभाग से जुड़े सभी लोग और दस्तावेज लेखन से जुड़े लेखक और अधिवक्ता तक हैरान हैं। इस सिलसिले में थाना सिविल लाइन में दर्द कराए गए मुकदमे में भूमि क्रय करने वाली तीन कंपनियां को नामजद किया गया है। इस पूरे प्रकरण का सबसे ज्यादा चौंकाने वाला तथ्य यह है कि दो-तीन अभिलेखों को छोड़कर सभी बैनामों के कागजात एक ही अधिवक्ता ने तैयार कराए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि इतने बड़े पैमाने पर स्टांप घोटाला इसके पीछे कहीं कोषागार से जुड़े अधिकारियों की संलिप्तता तो नहीं है।

हाल ही में इस प्रकरण को लेकर प्रदीप कुमार कनिष्ठ सहायक उप निबंधक सदर द्वितीय की ओर से सिविल लाइन थाने में फिर दर्ज कराई गई है। जिसमें मैसर्स पर्व एसोसिएट्स देव एसोसिएट्स और वासु एसोसिएट्स वगैरह को नामजद किया गया है। इन 997 अभिलेखों में सात करोड़ 31 लाख 45 हजार हजार रुपये के घोटाले की बात एफआईआर में कही गई है। गौरतलब है कि गाजियाबाद में एक प्रकरण सामने आने के बाद प्रदेश स्तर से जारी किए गए आदेश के अनुपालन में जिलाधिकारी स्टार से बीते तीन वर्षों में किए गए सभी बैनामों में 5000 या अधिक के स्टांप लगाए जाने के मामलों की गहनता से छानबीन कराई गई है।

इसके दौरान उपरोक्त तीन कंपनियों के माध्यम से क्रय की गई भूमि में यह फर्जी स्टांप लगाने के मामले प्रकाश में आए हैं। एडीएम वित्त एवं राजस्व के स्तर से यह स्पष्ट किया जा चुका है कि संपत्ति की खरीद करने वाली कंपनियों से स्टांप ड्यूटी पर 18 प्रतिशत ब्याज और जुर्माना वसूल करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन इस पूरे मामले में लगातार तीन वर्ष तक फर्जी स्टाफ लगाने वाले अधिवक्ता और सब कुछ अनदेखी करने वाले अधिकारी की भूमिका को लेकर फिलहाल कोई जवाब जांच अधिकारी देने को तैयार नहीं हैं।

हालांकि सूत्रों का यह भी कहना है कि यह उच्च स्तरीय मामला होने के कारण कार्यवाही लगातार जारी है और इतने बड़े स्तर पर स्टांप घोटाला करने वाले मगरमच्छों को भी दबोचने के लिए पर्याप्त प्रमाण जुटाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में संबंधित अधिवक्ता के बारे में फिर में उल्लेख भी कराया गया है। इस संबंध में डीआईजी स्टांप ज्ञानेंद्र कुमार का कहना है कि मामला बहुत गंभीर और संगीन है। जिसके हर पहलू की गहनता से जांच कराई जा रही है।

रिटायर्ड दारोगा के घर लाखों की चोरी

मेरठ: बेखौफ चोरों ने यूपी पुलिस से रिटायर्ड दारोगा के घर को निशाना बनाते हुए लाखों की नगदी और सोने-चांदी के जेवरातों पर हाथ साफ कर दिया। चोरी की घटना को जिस तरह अंजाम दिया गया उससे लगता है कि चोर पहले से ही घर की पूरी जानकारी रखते थे। मामला रोहटा रोड स्थित शांति कुंज कॉलोनी का है। जहां यूपी पुलिस से रिटायर्ड दारोगा सतेन्द्र परिवार के साथ रहते हैं। उनके दोनों बेटे भी पुलिस में ही कांस्टेबल है।

शुक्रवार देर रात करीब दो बजे दो चोर इनके घर में घुस आए और चोरी की घटना को अंजाम दिया। रिटायर्ड दारोगा के बेटे प्रिंस ने बताया कि चोरों ने ढाई लाख की नकदी और करीब 25 लाख के सोने-चांदी के जेवरों पर हाथ साफ कर दिया। बताया जा रहा है अलसुबह जब सतेन्द्र की पत्नी पानी पीने उठी तो उसने घर के दरवाजे खुले देखे जिसके बाद शोर मचाया। जागने पर देखा तो नीचे के कमरे में रखी सेफ में मौजूद नकदी व सोने-चांदी के जेवर गायब थे। सुबह पीड़ित परिवार ने थाना टीपी नगर पुलिस को सूचना दी।

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जिसके बाद सीओ ब्रह्मपुरी व टीपी नगर पुलिस ने घटना स्थल पर जाकर मामले की जानकरी ली। सतेन्द्र के दोनों बेटों में से एक बेटा प्रिंस दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल है, जबकि दूसरा बेटा विश्वेंद्र यूपी पुलिस में कांस्टेबल है। दोनों बेटों की पत्नियां भी पेशे से टीचर है। पुलिस ने जांच के दौरान पड़ोस में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी तो मध्य रात करीब डेढ़ बजे दो चोर सड़क से आते नजर आ रहे हैं। पीड़ित परिवार की ओर से थाना टीपीनगर में चोरों के खिलाफ तहरीर दी गई है। जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

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