Home Uttar Pradesh News Meerut कोरोना से लगा सदियों पुरानी परम्परा पर ग्रहण

कोरोना से लगा सदियों पुरानी परम्परा पर ग्रहण

1
कोरोना से लगा सदियों पुरानी परम्परा पर ग्रहण
फलावदा में ताजियों की जियारत करते अकीदतमंद।
  • लॉकडाउन में नही निकला मुहर्रम का जुलूस

जनवाणी संवाददाता |

फलावदा: वैश्विक महामारी कोरोना के चलते शहीदों के मातमी जुलूस पर लगे ग्रहण से सदियों पुरानी परंपरा टूट गई। मुहर्रम के अशरे में कर्बला के शहीदों का मातम सरकारी नियमों के तहत आहूत मजलिस तक ही सीमित होकर रह गया। हुकूमत की पाबंदी के कारण सोगवार मातमी जुलूस नहीं निकाल सके।

कस्बे के मोहल्ला कानी पट्टी में स्थित इमामबारगाह में इमाम हुसैन की याद में मजलिस आयोजित की गई, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन किया गया।

गमगीन माहौल में ताजि़या व अलम की ज़ियारत की गई। मौलाना हसनैन रिजवी़ ने मजलिस को ख़िताब करते हुए बताया कि दस मोहर्रम को पूरी दुनिया में इमाम हुसैन का ता़जिया शबीऐ जुु़लजनाह व जुलूस निकाला जाता है।

अबसे 14 सौ साल पहले इस्लाम व इंसानियत के दुश्मन यजी़द से हुसैन ने कहा था कि मुझ जैसा तुझ जैसे की कभी बैत नहीं कर सकता।उन्होंने अपनी व 72 साथियों की जान अल्लाह की राह में कुर्बान कर दी।

इस त्याग से उन्होंने दुनिया में इंसानियत को बचाया था। इमाम हुसैन की कुर्बानी को भुलाया नहीं जा सकता। इमामबारगाह में सिर्फ 5 लोग ही मातमपुर्सी को पंहुचे।

मजलिस में मर्सीयाख़्वानी मोहम्मद नबी व विकार नबी ने की। नोहाख़्वानी माहिर रजा़ ने की। इस दौरान ईनतेसाब रिजवी़, चांद रज़ा, दिलदार रज़ा, काज़िम रज़ा ही मौजूद रहे।

1 COMMENT

Comments are closed.