Tuesday, April 21, 2026
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खरना पूजा आज, प्रसाद ग्रहण के बाद निर्जल व्रत रखेंगी महिलाएं

  • पहले दिन व्रती घाटों पर डुबकी लगाकर सूर्यदेव की भक्ति में लीन नजर आई

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मंगलवार को नहाए खाए के साथ लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा का प्रारंभ हुआ। इस मौके पर लोग नानू की नहर, गगोल तीर्थ, ब्रजघाट, मुरादनगर नहर साथित विभिन्न घाटों पर छठ वृतियों कि भीड़ देखी गई। इस दौरान महिलाओं ने घरों में भी नहाए खाए की परंपरा निभाई। पहले दिन व्रती घाटों पर डुबकी लगाकर सूर्यदेव की भक्ति में लीन नजर आई। नहान के पश्चात लोग घरों के लिये मिट्टी व कलश में जल ले जाते नजर आये। महापर्व के पहले दिन व्रतियों ने चना लौकी की दाल, कद्दू, भात व बैंगन के पकोड़े का भोग छठी माता को लगाया।

इसी क्रम में भगवान आशुतोष की उपासना के महापर्व के दूसरे दिन आज पूजा का प्रारंभ खरवा से किया जाएगा। यह कार्तिक मास कि पंचमी तिथि को मनाया जाता है। बता दे कि छठ महापर्व में खरवा का अलग महत्व है। खरवा का अर्थ है शुद्धता। बता दे कि आज प्रात: काल से महिलाएं पूरे दिन व्रत रहती हैं। इस दौरान छठी मैया के लिए गुड़ की खीर व रोटी का प्रसाद तैयार किया जाता है। शाम को गुड़ से बनी खीर का भोग केले के पत्तों पर सात जगह छठी मैया को लगाया जाता है।

बता दे प्रसाद जब बनकर तैयार हो जाता है तब सबसे पहले व्रती को दिया जाता है, उसके बाद पूरे परिवार प्रसाद ग्रहण करता है। इस दौरान छठी मैया के गीत भी गाए जाते हैं। नहाय खाय के बाद आज खरना के साथ ही सूर्य की उपासना और निर्जला उपवास शुरू होगा। गुरुवार की शाम को असतागामी डूबते हुए सूर्य और शुक्रवार को सुबह उदयमान उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। उगते हुए सूरज को अर्घ्य देने के बाद छठव्रती उपवास का पारण करेंगे। सुबह उगते सूरज को अर्घ्य देने के बाद हर व्रती अन्न-जल ग्रहण करेंगे। आस्था के सबसे बड़े केंद्र गगोल तीर्थ पर छठ महोत्सव के मध्यनजर आज नगर निगम द्वारा सरोवर कि साफ-सफाई की जाएगी व गुरुवार से शुक्रवार तक मंदिर परिसर में मेला लगाया जाएगा।

नहाए-खाए के साथ छह दिन पर्व शुरू

मेरठ: लोक आस्था और सूर्योपासना का महापर्व नहाए-खाए के साथ शुरू हो गया। गगोल तीर्थ स्थित ऐतिहासिक सरोवर के चारों ओर छठ वृतियों ने पूजा-अर्चना के लिए पिंड बनाए। इस दौरान तीर्थ पर लोगों का आना जाना लगा रहा। मंगलवार सवेरे छठ व्रतियों ने स्नान कर सूर्य भगवान और छठी मईया को आराधना के साथ वृत का संकल्प लिया। छठ वृतियों ने गगोल तीर्थ पहुंचकर ऐतिहासिक सरोवर पर अपने नाम लिख पिंड बनाए। आज खरना के बाद निर्जला उपवास शुरू होगा, जो शुक्रवार तक सूर्य को अर्घ्य के साथ संपन्न होगा। छठ महापर्व के मद्देनजर गगोल तीर्थ पर सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त कर दिए गए। गगोल तीर्थ के महंत स्वामी शिवदास ने जानकारी दी कि छठ पर्व पर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व दूरदराज से हजारों की संख्या में छठ व्रती परिवार सहित आते हैं।

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