राजेंद्र शर्मा
लगान याद है। लगान, जो अंगरेजों के जमाने में लगा करता था। पूरे-पूरे गांवों पर, पूरे-पूरे जिलों पर, पूरे-पूरे इलाकों पर। अब उसकी धमाकेदार वापसी हो रही है। जो लगान, अंगरेजों के साथ 1947 में चला गया था, वही लगान 2025 में ट्रंप के साथ वापस लौट आया है। आप कहेंगे, पर ट्रंप की तो अमरीका में वापसी हुई है। फिर हिंदुस्तान में लगान की वापसी कैसे? यही तो ट्रम्प का चमत्कार या ट्रम्पियापा है। चार साल जब ट्रंप की अमरीका में भी वापसी नहीं हुई थी, तब भी ट्रंप की मुद्रा ऐसी थी जैसे उसकी वापसी हुई हो। और अब जब ट्रंप की अमरीका में वापसी हो गयी है, उसे लगता है कि सारी दुनिया में उसकी वापसी हो गयी है। भारत में ट्रंप की शक्ल में गोरों के राज की वापसी हो गई है।
गोरों के राज की वापसी हो गई, तो उसके बाद लगान की वापसी भी होनी ही थी। वैसे मोदी जी ने अपनी तरफ से बड़ी कोशिश की कि लगान की वापसी नहीं हो। डियर फ्रेंड, डियर फ्रेंड कर के, नए जमाने की रानी विक्टोरिया की खूब खुशामद की। एक से बढ़कर एक भेंटें भी दीं। पर ट्रंप नहीं पसीजा तो नहीं पसीजा। ट्रंप के राजतिलक में हाजिरी का न्यौता नहीं मिला, तब भी मोदी जी ने जय-जयकार करने के लिए अपना खास दूत भेजा। फिर खुद भी दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे। पर ट्रंप नहीं पिघला। उल्टे भारत पर तगड़ा लगान लगाने के इरादे का एलान कर दिया।
मोदी जी ने उसके साथ बड़े सौदे की पेशकश की। अगला फिर भी नरम नहीं पड़ा तो, अगले की बात मानकर, पाकिस्तान के साथ लड़ाई भी बंद कर दी। देश में विपक्ष के हजार बोल सहने पड़े, पर मजाल है जो मोदी जी ने ट्रम्प से शिकायत का एक लफ्ज तक जुबान पर आने दिया हो। फिर भी नाशुक्रा गोरा राजा नहीं माना और भारत पर लगान लगा दिया। वह भी छोटा-मोटा लगान नहीं, पूरा 25 फीसद लगान और वह भी दूसरे बहुत से देशों से बढकर। और इतने से भी ट्रंप को संतोष नहीं हुआ तो यह लगान डबल यानी 50 फीसद करने का एलान कर दिया। डबल लगान, सजा के तौर पर। सजा किस बात की। विश्व सम्राट के हुक्म के बाद भी रूस से रिश्ते रखने की सजा। खासतौर पर रूस से तेल खरीदने की सजा। अब अगला सम्राट हो गया है, तो बाकी सब तो उसकी प्रजा हो ही गए।
डबल लगान, मोदी जी सिर्फ परेशान। चीन तो चीन, ब्राजील वालों की तरह भी, बगावत की बोली तो बोल नहीं सकते। ब्राजील वालों की तरह लगान के एलान के जवाब में, यह तो कह नहीं सकते कि तूने पचास फीसद लगान लगाया, तो हम भी पचास फीसद लगान लगाते हैं। ट्रंप जी को और नाराज किसी भी तरह नहीं कर सकते। वर्ना, अडानी भाई का ना जाने क्या हो? और अंबानी भाई पर तो सीधे तेल वाले जुर्माने की मार पड़नी ही है। हिंदुस्तानी पब्लिक के हिस्से में तो महंगे तेल के बदले में, सिर्फ भारतभक्ति का सर्टिफिकेट आया है। उसे तेल महंगा खरीदना पड़ा तो क्या हुआ, विश्व के सबसे अमीरों में एक भारतीय ऊपर तो चढ़ रहा था।

