Friday, February 6, 2026
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Earthquake: पूर्वी अफगानिस्तान में शक्तिशाली भूकंप, 600 से अधिक लोगों की मौत, सैकड़ों घायल,राहत-बचाव कार्य जारी

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: पूर्वी अफगानिस्तान के पाकिस्तान सीमा से सटे इलाकों में रविवार देर रात आए शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 610 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 1300 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

भूकंप की तीव्रता 6.0 मापी गई और इसका केंद्र नंगरहार प्रांत के जलालाबाद शहर से 27 किमी पूर्वोत्तर में स्थित था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप रात 11:47 बजे महज 8 किलोमीटर की गहराई में आया, जिससे इसका प्रभाव बेहद गंभीर रहा।

तालिबान सरकार के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतीन कानी ने बताया कि कुनार प्रांत में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जहां अकेले 610 लोगों की मौत और 1300 घायल हुए हैं। इसके अलावा नंगरहार प्रांत में भी एक दर्जन लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबर है।

गांवों का नामो-निशान मिटा

कुनार आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, भूकंप ने नूर गुल, सोकी, वातपुर, मनोगी और चापादारे जिलों में भारी तबाही मचाई है। इन जिलों में 250 लोगों की मौत और 500 से अधिक घायल होने की पुष्टि की गई है।

जन स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शराफत जमान ने बताया, “कई गांव पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन कई इलाकों से सूचना नहीं मिल पाई है, इसलिए मृतकों की संख्या में और वृद्धि की आशंका है।”

जलालाबाद में हालात गंभीर

भूकंप से सबसे नजदीक स्थित शहर जलालाबाद, एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। पाकिस्तान सीमा के निकट होने के कारण यहां बड़ी जनसंख्या निवास करती है। अनुमानित जनसंख्या 3 लाख से अधिक है। शहर की अधिकतर इमारतें कंक्रीट और ईंटों से बनी हैं, जबकि बाहरी इलाकों में मिट्टी और लकड़ी के घर हैं, जो भूकंप में आसानी से ढह गए।

अफगानिस्तान में भूकंप का इतिहास

यह घटना अफगानिस्तान में हाल के वर्षों की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक बनती जा रही है। इससे पहले 7 अक्तूबर, 2023 को आए 6.3 तीव्रता के भूकंप में तालिबान सरकार ने करीब 4,000 मौतों का अनुमान जताया था, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने लगभग 1,500 मौतों की पुष्टि की थी।

सरकार और अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील

तालिबान प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आपात सहायता की अपील की है। राहत सामग्रियों की कमी, सुदूरवर्ती इलाकों में संचार साधनों की टूट-फूट और चिकित्सा सुविधाओं की कमी राहत कार्यों में बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है।

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