Saturday, April 4, 2026
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Baghpat Breaking: आधार कार्ड में खेल, एक ही नंबर के दो आधार

जनवाणी संवाददाता |

बागपत: आधार कार्ड को सबसे बड़ा मजबूत पहचान का दस्तावेज माना जाता है, लेकिन इसमें ही फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। आधार का जनवाणी नंबर एक, लेकिन दो अलग-अलग नाम विशेष आम से कद बना का आधार दिल्ली का है तो दूसरी का बागपत का है। दिल्ली की बच्ची का दाखिला उस आधार से वहां हो रखा है, जबकि बागपत निवासी बच्ची का दाखिला नहीं हो पा रहा है। जबकि ऑनलाइन बागपत की बच्ची के नाम दर्शाता है। दाखिले के लिए फीड किया जाता है तो वह रिजेक्ट हो जाता है। आधार कार्ड के इस फर्जीवाड़े से अभिभावक भी परेशान है और मासूम बच्ची का दाखिला नहीं हो पा रहा है। ऐसे न जाने कितने मामले स्कूलों में दाखिले के समय सामने आ रहे हैं।

प्राइवेट स्कूलों में भी आधार कार्ड के बिना दाखिला नहीं

परिषदीय स्कूलों में आधार कार्ड से दाखिला अनिवार्य कर रखा है। इसके अलावा प्राइवेट स्कूलों में भी आधार कार्ड के बिना दाखिला नहीं होता है, लेकिन जब आधार कार्ड में ही फर्जीवाड़ा हो जाए तो दाखिला भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे ही मामले इन दिनों स्कूलों में आ रहे हैं। बागपत नगर के परिषदीय स्कूल में एक अभिभावक अपनी छह वर्षीय बेटी मन्नत का दाखिला कराने पहुंचता है।

एक ही नंबर के दो आधार कार्ड से शिक्षक भी हैरान

शिक्षिका ने जब उसका आधार कार्ड लिया और उसका नंबर पोर्टल पर फीड किया तो उस नंबर पर पहले ही एक दाखिला हुआ मिला। वह दाखिला दिल्ली में एक प्राइवेट स्कूल में मिला है। वहां उस आधार पर नंबर दृष्टि नाम की छह वर्षीय बच्ची का दाखिला हो रखा है। एक ही नंबर के दो आधार कार्ड से शिक्षक भी हैरान रह गए। पोर्टल पर दृष्टि के स्कूल की जानकारी देखकर उस स्कूल से संपर्क किया गया और इस समस्या से अवगत कराया तो उन्होंने उसे बदलने से इंकार कर दिया। जबकि बागपत निवासी मन्नत का दाखिला नहीं हो पा रहा है। क्योंकि पोर्टल पर मन्नत का आधार कार्ड अपलोड नहीं हो पा रहा है। अब उसके अभिभावक आधार कार्ड के लिए परेशान घूम रहे हैं।

आखिर एक नंबर के दो आधार कार्ड कैसे बन गए?

अब सवाल यह है कि आखिर एक नंबर के दो आधार कार्ड कैसे बन गए? जबकि ऑनलाइन देखते हैं तो यूपी का आधार कार्ड दर्शाता है? यानी दिल्ली का आधार कार्ड फर्जी है? यह तो जांच में ही पता चलेगा कि आखिर फर्जी कौन सा है ? इतना जरूर है कि दिल्ली की बच्ची का दाखिला हो चुका है और बागपत की मन्नत दाखिले से अभी वंचित है। बीएसए गीता चौधरी का कहना है कि जो भी इस तरह के मामले आते हैं उनमें अभिावकों को आधार कार्ड आई टीका कराने के लिए कहा जाता है। नहीं हो सकता। हालांकि एक ही नंबर के दो आधार कार्ड का मामला गंभीर है।

नहीं होते थे फिंगर प्रिंट, अब होंगे

बताया जाता है कि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के फिंगर प्रिंट नहीं लगाए जाते थे। कई बार ऐसा होता है कि आधार कार्ड सस्पेंड हो गया हो और उसे ठीक न कराया गया हो? हालांकि अब परिषदीय स्कूलों में बच्चों के फिंगर प्रिंट से आधार कार्ड बनाना अनिवार्य कर दिया गया है और इसके लिए स्कूलों का शेड्यूल भी जारी हो गया है।

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