Wednesday, February 11, 2026
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Saharanpur News: साइलेंट किलर मधुमेह पर रोक जरूरी : डॉ. मिगलानी

जनवाणी संवाददाता |

सहारनपुर: विश्वभर में हर साल 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि लोगों को मधुमेह जैसी गंभीर और बढ़ती बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके। यह दिन नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक फ्रेडरिक बैंटिंग के जन्मदिन की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने इंसुलिन की खोज की थी। इस अवसर पर डॉ. संजीव मिगलानी (एमडी, गोल्ड मेडलिस्ट, हार्वर्ड प्रशिक्षित) ने बताया कि मधुमेह एक साइलेंट किलर है, जो धीरे-धीरे शरीर के हर अंग को नुकसान पहुंचाता है।

हर मिनट एक मौत

डॉ संजीव मिगलानी ने बताया कि भारत में हर मिनट एक व्यक्ति की मौत सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से मधुमेह से जुड़ी जटिलताओं के कारण होती है। 2045 तक देश में मरीजों की संख्या 13 करोड़ से ऊपर पहुंच सकती है। डॉ मिगलानी ने बताया कि वर्तमान में देश के लगभग दस करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित हैं।हर साल छह लाख से अधिक मौतें होती हैं।शहरों के साथ अब गाँवों में भी तेजी से बढ़ रहा है रोग।बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज के मामले तीस प्रतिशत तक बढ़े हैं।

जीवनशैली सुधारने का अवसर

डॉ. मिगलानी ने कहा कि मधुमेह कोई सजा नहीं, बल्कि जीवनशैली सुधारने का अवसर है। उन्होंने बताया कि रोगी अगर सही आहार, व्यायाम और समय पर जांच करते रहें तो बीमारी पूरी तरह नियंत्रण में रखी जा सकती है। मधुमेह के रोगियों को सिर्फ दवाइयों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि खानपान में अनुशासन और मानसिक शांति भी उतनी ही जरूरी है।

नियंत्रण का ए से एफ फार्मूला

डॉ मिगलानी कहते हैं कि मधुमेह पर नियंत्रण के लिए ए से एफ तक का फार्मूला है।डॉ मिगलानी के मुताबिक ए – तीन महीने में एक बार एचबीए1सी जांच
बी – ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें
सी – कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच
डी – संतुलित और नियंत्रित आहार
ई – रोजाना कम से कम तीस मिनट व्यायाम
एफ – पैरों और आंखों की जांच कराते रहें

जंक फूड और निष्क्रिय जीवनशैली है कारण

डॉ. मिगलानी के अनुसार, लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर हृदय, किडनी, आंख और नसों को गंभीर नुकसान पहुंचाती है। कई बार यह बिना लक्षणों के बढ़ती रहती है, इसलिए नियमित जांच बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेल्योर, रेटिना डैमेज और घाव न भरने जैसी स्थितियां अधिक पाई जाती हैं।उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति को चालीस वर्ष की आयु के बाद नियमित ब्लड शुगर की जांच अवश्य करानी चाहिए। बच्चों में भी अब टाइप-2 डायबिटीज के केस तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसका मुख्य कारण जंक फूड और निष्क्रिय जीवनशैली है।

क्या खाएं और क्या न खाएं

खाने योग्य – सलाद, मूली, खीरा, सूप, छाछ, हरी सब्जियाँ, फल जैसे पपीता, सेब, संतरा
परहेज करें – चीनी, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, शराब, सूखे मेवे, आम, केला, चीकू

व्यायाम ही असली दवा

रोजाना तीस से पैंतालीस मिनट टहलना, साइकिल चलाना या योग करना ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। डॉ. मिगलानी कहते हैं कि अगर दवा छोड़ दें तो बीमारी बढ़ेगी, लेकिन अगर व्यायाम शुरू कर दें तो दवा कम हो सकती है।अंत में डॉ. मिगलानी ने कहा कि मधुमेह के खिलाफ लड़ाई एक व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज का सामूहिक प्रयास है। इस विश्व मधुमेह दिवस पर हर व्यक्ति को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह खुद और अपने परिवार को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

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