जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पाकिस्तान, जो आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, अपनी राष्ट्रीय एयरलाइंस पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) को बेचने की योजना बना रहा है। शहबाज सरकार PIA की 75% हिस्सेदारी बेचने का फैसला कर चुकी है, और बोली लगाने की अंतिम तारीख 23 दिसंबर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बोली प्रक्रिया के आखिरी दिन, सेना से जुड़ी खाद कंपनी फौजी फर्टिलाइजर प्राइवेट लिमिटेड (FFPL) ने बोली में भाग लेने से अपना नाम वापस ले लिया है। अब केवल तीन दावेदार रह गए हैं।
सरकार को PIA बेचने की वजहें
IMF के दबाव में प्राइवेटाइजेशन: पाकिस्तान को IMF से 7 अरब डॉलर का लोन चाहिए, जिसके बदले IMF ने पाकिस्तान से घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों को प्राइवेटाइज करने की मांग की है। इस शर्त के तहत पाकिस्तान 24 सरकारी कंपनियों को प्राइवेट कर रहा है, जिसमें PIA भी शामिल है।
आर्थिक तंगी और घाटा: PIA को चलाने में भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। सरकार के पास निवेश करने का पैसा नहीं है और एयरलाइंस के खराब प्रबंधन के कारण यात्रियों को भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
PIA की खराब छवि: 2020 में कराची में PIA का एक प्लेन क्रैश हुआ था, जिसमें 96 लोगों की जान गई थी। इसके अलावा, जांच में 250 से ज्यादा पायलटों के लाइसेंस संदिग्ध पाए गए थे। इस हादसे और पायलटों की गलती ने PIA की छवि को भारी नुकसान पहुंचाया और कई देशों ने उसकी फ्लाइट्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके कारण कंपनी पर करीब 25,000 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया।
ग्राफ में सुधार की उम्मीद: पाकिस्तान के एविएशन सेक्टर का GDP में योगदान केवल 1.3% है, जो कि यूएई (18%) और सऊदी अरब (8.5%) के मुकाबले बहुत कम है। प्राइवेटाइजेशन से इस सेक्टर में विकास की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
सरकार ने क्या पहले बेचा?
पाकिस्तान पहले ही कई सरकारी एयरपोर्ट और बंदरगाहों को बेच चुका है। पिछले साल इस्लामाबाद एयरपोर्ट को ठेके पर देने का फैसला लिया गया था, और यह सरकारी नीतियों के तहत किया गया था।
नीलामी प्रक्रिया
PIA की नीलामी में सीलबंद बोली (क्लोज़्ड बिडिंग) की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। 23 दिसंबर को सुबह 10:45 से 11:15 के बीच तीन दावेदार अपनी बोली की रकम एक सीलबंद लिफाफे में डालकर एक ट्रांसपेरेंट बॉक्स में रखेंगे। इस प्रक्रिया के दौरान बोली लगाने वाले दावेदारों को यह नहीं पता होगा कि दूसरे ने कितनी बोली लगाई है। इसके बाद, एक बोर्ड बैठक में ‘रेफरेंस प्राइस’ तय किया जाएगा, जिसे कैबिनेट कमेटी द्वारा मंजूरी दी जाएगी। अगर कोई बोली सरकार द्वारा तय की गई कीमत से अधिक होगी, तो ओपन ऑक्शन हो सकता है, लेकिन यदि बोली कम रही तो सबसे अधिक बोली लगाने वाले को प्राथमिकता दी जाएगी।
PIA को खरीदने के लिए दावेदार
PIA को खरीदने के लिए तीन प्रमुख दावेदार हैं:
लकी सीमेंट एंड कंपनीज: इस ग्रुप में लकी सीमेंट लिमिटेड, हब पावर होल्डिंग्स, कोहाट सीमेंट कंपनी और मेट्रो वेंचर्स शामिल हैं।
आरिफ हबीब एंड कंपनीज: इस ग्रुप में आरिफ हबीब कॉर्पोरेशन लिमिटेड, फातिमा फर्टिलाइजर, सिटी स्कूल्स और लेक सिटी होल्डिंग्स शामिल हैं।
एयरब्लू प्राइवेट लिमिटेड: यह कंपनी अकेले बोली लगा रही है।
फौजी फर्टिलाइजर ने क्यों लिया नाम वापस?
फौजी फर्टिलाइजर, जो पाकिस्तान आर्मी से जुड़ी एक खाद कंपनी है, ने 21 दिसंबर को बोली प्रक्रिया से अपना नाम वापस ले लिया। इसके तीन मुख्य कारण बताए गए:
फ्लेक्सिबिलिटी की आवश्यकता: बिडिंग कमेटी के अधिकारियों के अनुसार, फौजी फर्टिलाइजर ने नाम वापस लिया ताकि उसे भविष्य में किसी और कंपनी के साथ मिलकर डील करने का अवसर मिल सके, अगर वह बाद में जीतने वाली कंपनी के साथ साझेदारी करना चाहे।
सैन्य नियंत्रण से बचाव: फौजी फर्टिलाइजर पाकिस्तानी सेना से जुड़ी है, और इस कंपनी के एक बोर्ड सदस्य को सेना के प्रमुख नियुक्त करते हैं। यदि सेना की किसी कंपनी ने बोली जीती, तो यह IMF के नियमों के खिलाफ हो सकता था और गलत संदेश भी जा सकता था।
बोली हारने का डर: फौजी फर्टिलाइजर को डर था कि अगर वह बोली हार जाए, तो PIA पर सैन्य नियंत्रण का मौका हाथ से जा सकता है। इस डर से, उसने नाम वापस ले लिया और अब वह जीतने वाली कंपनी के साथ जुड़ने का विचार कर सकती है।
किसके जीतने के चांस ज्यादा हैं?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लकी सीमेंट और आरिफ हबीब के गठबंधनों को जीतने का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है, क्योंकि ये दोनों बड़े व्यापार समूह हैं। एयरब्लू के चांस कम हैं, क्योंकि यह अकेली कंपनी है और इसकी वित्तीय स्थिति अन्य दावेदारों के मुकाबले कमजोर है।

