जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब राष्ट्रीय कार्यक्रमों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ बजाना या गाना अनिवार्य होगा। गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार, आधिकारिक अवसरों पर वंदे मातरम का छह अंतरा वाला संस्करण बजाना जरूरी है, जिसकी कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड होगी।
नई गाइडलाइन के अनुसार यह नियम राष्ट्रीय ध्वज फहराने, राष्ट्रपति के आगमन या उनके संबोधन से पहले और बाद में लागू होगा। इसके साथ ही सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और औपचारिक आयोजनों में भी इसे बजाना या गाना अनिवार्य होगा।
राष्ट्रगान से पहले बजाना अनिवार्य
दिशानिर्देश के मुताबिक, जब किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम और जन गण मन दोनों हों, तो राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान से पहले प्रस्तुत किया जाएगा। इसके दौरान सभी उपस्थित व्यक्तियों का खड़ा होना अनिवार्य होगा।
शिक्षा संस्थानों में भी बढ़ावा
गृह मंत्रालय ने शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे रोजाना प्रार्थना या अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम का गायन कर छात्रों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाएं।
सिनेमा हॉल को नई गाइडलाइन से छूट
हालांकि, सिनेमा हॉल इस नियम से बाहर हैं। यानी फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम बजाना या खड़ा होना जरूरी नहीं होगा।
राष्ट्रगीत वंदे मातरम का इतिहास और भावार्थ
वंदे मातरम बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 7 नवंबर 1875 को लिखा गया था। इसका मूल संस्करण छह पदों का है, जिनमें दो पद संस्कृत और बाकी चार बंगाली भाषा में हैं, जिसमें संस्कृत के शब्दों का मिश्रण है।
पहला पद: ‘वन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। वन्दे मातरम्॥’
भावार्थ: मैं मातृभूमि भारत को प्रणाम करता हूं, जो जल-फल-फूलों से परिपूर्ण और हरे-भरे खेतों वाली है।
दूसरा पद: ‘शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्, फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्… वन्दे मातरम्॥’
भावार्थ: मैं मातृभूमि को प्रणाम करता हूं, जो चांदनी रातों जैसी सुंदर, फूलों से सजी, मधुर मुस्कान और बोली वाली है।
तीसरा पद: ‘कोटि-कोटि कण्ठ कल-कल निनाद कराले… वन्दे मातरम्॥’
भावार्थ: तेरे गले से जयकारों की गूंज उठती है। तेरे हाथों में अस्त्र हैं, फिर भी कोई तुझे असहाय कहता है? मैं तेरी शक्ति और साहस को नमन करता हूं।
चौथा पद: ‘तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि हदि तुमि मर्म… वन्दे मातरम्॥’
भावार्थ: हे मां, तुम ही ज्ञान और धर्म हो। हमारे प्राण, शरीर और हृदय में भी तुम ही हो।
पांचवा पद: ‘त्वमहि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी, कमला कमलदलविहारिणी… वन्दे मातरम्॥’
भावार्थ: तुम दुर्गा और लक्ष्मी हो, विद्या और वाणी देने वाली, निर्मल और अतुल्य माता हो।
छठा पद: ‘श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूमिताम्, धरनीम् भरनीम् मातरम्। वन्दे मातरम्॥’
भावार्थ: हे मां, तू हमारी आन, शान और सुख-संपत्ति का स्रोत है।

