Sunday, February 8, 2026
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जानिए, अखिलेश यादव की ख़ामोशी से मुस्लिम समाज में क्यों बढ़ी बेचैनी ?

सरकार के निशाने पर आये समाजवादी पार्टी के कद्दावर मुस्लिम नेता 

कैराना के हसन परिवार और रामपुर के आजम परिवार पर हुई कार्रवाई


ज्ञान प्रकाश |

मेरठ: एक समय में मुलायम सिंह यादव को सरपरस्त मानने वाला प्रदेश का मुस्लिम वोटर इस वक्त असमंजस की स्थिति में आ गया है। कैराना के जिस हसन परिवार और रामपुर के आजम परिवार ने विपरीत परिस्थितियों में समाजवादी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाले मुस्लिम समाज ने बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस से दूरियां बनाईं थीं।

आज उन्हीं मुस्लिम परिवारों के विरुद्ध वर्तमान प्रदेश सरकार कार्रवाई कर परेशान कर रही है तब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बजाय विरोध करने के खामोशी साध ली। सपा प्रमुख के इस कदम से वेस्ट यूपी का मुस्लिम वोटर खुद को ठगा महसूस कर रहा है।

कैराना का हसन परिवार काफी प्रतिष्ठित और राजनीतिक रूप से काफी मजबूत माना जाता है। इस परिवार के स्व. अख्तर हसन कैराना से सांसद थे। उनके बेटे स्व. मुनव्वर हुसैन तीन बार लोकसभा सदस्य, एक बार राज्य सभा सांसद, दो बार विधायक और एक बार एमएलसी रहे। इनके नाम वर्ल्ड रिकार्ड भी बना कि किसी भी देश की सभी सदनों का वो प्रतिनिधित्व कर चुके थे। उनकी पत्नी तब्बसुम दो बार कैराना से सांसद रही हैं। जबकि उनका बेटा नाहिद हसन दो बार विधायक बन चुका है।

मुलायम की नीति के खिलाफ चल रहे अखिलेश
जिस तरह से मुलायम सिंह अपने कार्यकर्ताओं के लिए जान छिड़कते थे। वैसा उनका बेटा और समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ठीक विपरीत चल रहा है और सिर्फ ट्यूटर के सहारे अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि पहले ऐसा नही होता था। इस कारण मुस्लिम समाज मुलायम सिंह यादव के साथ तनमन से जुड़ा था अब बेरुखी के कारण मुस्लिम समाज कुछ सोचने को मजबूर हो गया है।

सबसे छोटी उम्र में विधायक बनने वाले नाहिद हसन और उनकी मां तब्बसुम पर प्रशासन ने गैंगस्टर ऐक्ट के तहत कार्रवाई की है। देश के प्रतिष्ठित हसन परिवार और रामपुर के आजम परिवार पर जिस तरह से गैंगस्टर ऐक्ट के तहत कार्रवाई की गई है उसने साबित कर दिया है इन मुस्लिम परिवारों पर राजनीतिक कुठाराघात हुआ है। इन दोनों परिवारों को ऐसे समय में अपने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मानसिक रूप से मदद की उम्मीद थी कि पार्टी बदले की भावना से की जा रही कार्रवाई का खुलकर राजनीतिक विरोध करे।

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मुस्लिम वोटर इस बात से अपने को ठगा महसूस कर रहा है कि आजम खान और उनका परिवार काफी लंबे समय से जेल में बंद है, लेकिन समाजवादी पार्टी ने इसे मुद्दा बनाकर राजनीतिक विरोध नहीं किया। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को प्रदेश का मुस्लिम समाज अपना रहनुमा मानता है और हर बार खुलकर सपोर्ट करता है।

दरअसल, मुस्लिम वोटर्स पहले कांग्रेस और बसपा से दिल से जुड़े थे, लेकिन सपा ने जिस तरह से मुसलमानों को तरजीह दी और उनके सुख-दुख में साथ खड़े होकर दिखाया तो प्रदेश में मुसलमान सपा का पर्याय बन गया। अब हालात यह हो गए हैं कि समाजवादी पार्टी के मुस्लिम कद्दावर नेता परेशानी के दौर से गुजर रहे हैं और पार्टी उनके लिये कोई राजनीतिक कदम तक नहीं उठा रही है।

कहीं भारी न पड़ जाए अजेय दुर्ग की अनदेखी
कैराना और रामपुर समाजवादी पार्टी के लिये अजेय दुर्ग के रूप में काम करते हैं। इन दोनों अजेय दुर्गों के नेता नाहिद हसन और आजम खान के बुरे वक्त में जिस तरह सपा मुखिया ने बेवफाई का परिचय दिया है उससे राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा फैल रही है कि कहीं इस तरह की बेरुखी पार्टी के लिये भारी न पड़ जाए। हर कोई यह कहने से नहीं चूक रहा है कि मुलायम सिंह की मुस्लिम विरासत को उनका बेटा अखिेलश कहीं गंवा न दे।

 

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