Wednesday, February 11, 2026
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चीन से तनाव पर संसद में चर्चा नहीं, कांग्रेस पड़ी अलग-थलग

आज राज्यसभा में चीन के मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह देंगे बयान

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ जारी तनाव के मामले पर सरकार संसद में चर्चा नहीं कराएगी। सरकार की रणनीति विपक्षी दलों के नेताओं से अलग-अलग संवाद करने की है।

इसके जरिये सरकार विपक्ष को चर्चा की मांग नहीं करने के लिए मनाएगी। बुधवार को सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भी इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार को राज्यसभा में इस मुद्दे पर बयान देंगे।

सूत्रों के मुताबिक, सत्र शुरू होने से पहले सरकार की योजना सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर विपक्ष को जानकारी देने की थी। बाद में ऐसा नहीं करने की रणनीति बनी।

एक मंत्री के मुताबिक, वैसे भी सत्र में कांग्रेस को छोड़ कर अन्य कोई दल चर्चा की मांग नहीं कर रहा है। अन्य दल तनाव की स्थिति के दौरान एकजुटता का संदेश दे रहे हैं। चूंकि, मांग सिर्फ कांग्रेस की ओर से आ रही है, इसलिए सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुला कर इस मुद्दे पर बात करने की योजना टाल दी।

सर्वदलीय बैठक के बाद विपक्षी दलों से जुड़े नेताओं से अलग-अलग संवाद का सिलसिला शुरू हो गया है। सूत्रों ने बताया, इस क्रम में कुछ दलों के नेताओं से बातचीत हो गई है।

अभी एक-दो दिनों तक यह सिलसिला जारी रहेगा। हालांकि इतना तय है कि सरकार न तो इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराएगी और न ही बयान के बाद रक्षा मंत्री किसी सवाल का जवाब देंगे।

राजनाथ के बयान में मिलेगा विपक्ष को जवाब

लोकसभा में चीन से तनाव पर मंगलवार को रक्षामंत्री के बयान पर कई विपक्षी दलों ने जानकारियां मांगी थीं। गुरुवार को जब रक्षा मंत्री राज्यसभा में इस मामले में बयान देंगे तो विपक्ष की ओर से उठाए गए कुछ सवालों का जवाब देंगे।

बैठक में बिल पर हुई चर्चा

करीब डेढ़ घंटे चली बैठक के बाद राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि इसमें चीन के मसले पर कोई चर्चा नहीं हुई। चर्चा भविष्य में पेश होने वाले बिलों पर हुई। सरकार ने बिल को पेश करने के क्रम और स्क्रूटनी से संबंधित मामले में विपक्ष के नेताओं के साथ चर्चा की।

कांग्रेस है अलग-थलग

चीन से जारी तनातनी के बीच फिलहाल सिर्फ कांग्रेस के तेवर ही आक्रामक हैं। शिवसेना ने भले ही संसद के बाहर इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ बयान दिया है, मगर संसद में उसकी भूमिका आक्रामक नहीं है। सपा, बसपा, वाईएसआर कांग्रेस, टीआरएस, बीजेडी जैसे दलों ने न तो आक्रामक तेवर दिखाए हैं और न ही इस पर चर्चा की मांग की है।

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