- जनता ने दिया साथ तो किसान विरोधी कानून को उखाड़ फेंकेगी कांग्रेस सरकार
- पंजाब-हरियाणा के ग्रामीण विकास पर पड़ेगा सीधा असर
- उद्योगपतियों को मिलेगा भरपूर फायदा, किसान हो जाएगा कंगाल
जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: किसान विरोधी भाजपा सरकार केवल और केवल उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है। जिस बात को कांग्रेस पार्टी पहले से कहती आ रही है आज वही सच देश की जनता के सामने आ ही गया और नरेंद्र मोदी सरकार का असली चेहरा किसान विरोधी सबके सामने है।
जिस प्रकार से ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत को गुलाम बनाया था ठीक उसी प्रकार भाजपा सरकार देश के अन्नदाता गरीब किसानों को गुलाम बनाने की नीयत से कृषि बिल लाई है। इस बिल के जरिए किसानों की उपज पर पूंजीपतियों और उद्योग घरानों का कब्जा होगा। किसान घुट घुट कर मरने के लिए विवश होगा।
उक्त बातें कांग्रेस पार्टी के सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने दैनिक जनवाणी से एक खास बातचीत के दौरान किसानों की हालत पर चिंता व्यक्त करते हुए कही। श्री बाजवा ने आगे बताया कि जब से देश में नरेंद्र मोदी की सरकार आई है तभी से यह सरकार अंबानी और अडानी के लिए काम कर रही है।
इस बात का सटीक उदाहरण है कि जियो सिम का लालच देकर कई छोटी छोटी कंपनियां इसकी भेंट चढ़ गईं और अब बाजार में केवल तीन मोबाइल कंपनियों का राज हो गया। ठीक इसी प्रकार केंद्र सरकार के निशाने पर अब देश का गरीब मजलूम वह किसान है जो पूरे देश का पेट भर रहा है। अब इन किसानों को गुलाम बनाने के लिए सरकार ने बिल पास करा लिया है। इस कृषि बिल के जरिए सरकार सबसे पहले फूड कॉरपोरेशन आफ इंडिया पर ताला लगाएगी।
सांसद श्री बाजवा ने बताया कि इन बिल (विधेयकों) पर किसानों की सबसे बड़ी चिंता न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर है। सरकार बिल की आड़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य आने वाले पांच सालों में धीरे धीरे खत्म कर देगी।
किसानों की मेहनत पर पूरी तरह से प्राइवेट कंपनियों के हाथ में चला जाएगा और किसान बेबस और लाचार होकर कुछ नहीं कर सकता। मंडियां खत्म हो जाएंगी। मंडी शुल्क से गांव को जोड़ने वाली तमाम सड़कों आदि का विकास ठप पड़ जाएगा। हजारों हजार कमीशन एजेंट्स नए कानून से बेरोजगार होकर सड़कों पर आ जाएगा। लाखों की तादात में मजदूर भूख से बिललिाएगा।
सांसद श्री बाजवा बताया कि जब मंडी के बाहर बिना शुल्क का कारोबार होगा तो कोई मंडी आना नहीं चाहेगा। वहीं, पंजाब और हरियाणा में एमएसपी पर गेहूं और धान की सरकारी खरीद की जाती है। नये कानून के बाद एमएसपी पर खरीद नहीं होगी क्योंकि विधेयक में इस संबंध में कोई व्याख्या नहीं है कि मंडी के बाहर जो खरीद होगी वह एमएसपी से नीचे के भाव पर नहीं होगी।
पंजाब और हरियाणा में एपीएमसी मंडियों का अच्छा इन्फ्रास्ट्रक्चर है और एमएसपी पर गेहूं और धान की ज्यादा खरीद होती है। पंजाब में मंडियों और खरीद केंद्रों की संख्या करीब 1,840 हैं और ऐसी मंडी व्यवस्था दूसरी जगह नहीं है।
सांसद श्री बाजवा बताया कि पंजाब ने देश को अनाज उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनाया है। पंजाब के किसान अपना पानी त्याग कर देश के लिए अनाज पैदा करता है। पंजाब में पूरी दुनिया में सबसे अच्छी मंडी व्यवस्था है, इस विधेयक के पारित होने के बाद चरमरा जाएगी।
सांसद श्री बाजवा बताया कि इस कानून से किसान अपने ही खेत में सिर्फ मजदूर बनकर रह जाएगा। केंद्र सरकार पश्चिमी देशों के खेती का मॉडल हमारे किसानों पर थोपना चाहती है। कांट्रैक्ट फार्मिंग में कंपनियां किसानों का शोषण करती हैं। उनके उत्पाद को खराब बताकर रिजेक्ट कर देती हैं। दूसरी ओर व्यापारियों को डर है कि जब बड़े मार्केट लीडर उपज खेतों से ही खरीद लेंगे तो आढ़तियों को कौन पूछेगा। मंडी में कौन जाएगा।
जब किसानों के उत्पाद की खरीद मंडी में नहीं होगी तो सरकार इस बात को रेगुलेट नहीं कर पाएगी कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल रहा है या नहीं। एमएसपी की गारंटी नहीं दी गई है।
सांसद श्री बाजवा बताया कि सरकार के नए कानून में साफ लिखा है कि मंडी के अंदर फसल आने पर मार्केट फीस लगेगी और मंडी के बाहर अनाज बिकने पर मार्केट फीस नहीं लगेगी। ऐसे में मंडियां तो धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगी। कोई मंडी में माल क्यों खरीदेगा।
एक्ट में संशोधन बड़ी कंपनियों और बड़े व्यापारियों के हित में किया गया है। ये कंपनियां और सुपर मार्केट सस्ते दाम पर उपज खरीदकर अपने बड़े-बड़े गोदामों में उसका भंडारण करेंगे और बाद में ऊंचे दामों पर ग्राहकों को बेचेंगे।

