Sunday, February 8, 2026
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सपा में इमरान की इंट्री को लेकर सियासी प्याले में तूफान

  • इमरान सपा में गए तो भाजपा को सभी सीटों पर लाभ की उम्मीद
  • इमरान के कथित बोटी-बोटी वाले बयान को हथियार बना सकती है भाजपा

मुख्य संवाददाता |

सहारनपुर: राज्य में जल्द होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर उथल-पुथल और पाला बदलने का सिलसिला कुछ ज्यादा ही तेज हो चला है।

इस बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक इमरान मसूद फिर सुर्खियों में हैं। दरअसल, इमरान के समाजवादी पार्टी में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है।

उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि इसी सप्ताह इमरान सपा में शामिल होने की घोषणा कर देंगे। सियासी पंडितों का कहना है कि इमरान के सपा में आते ही अलग समीकरण बनेंगे और भाजपा को इसका सबसे ज्यादा लाभ होगा।

इसलिए कि इमरान के सपा में आते ही सहारनपुर की सभी सीटों पर चुनाव हिंदू-मुस्लिम (एच-एम) में विभक्त हो जाएगा। वहीं, सपा में दूसरा धड़ा जो इमरान विरोधी है, वह अंदरखाने काट शुरू कर देगा।
पूर्व विधायक इमरान मसूद किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वह पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री काजी रशीद मसूद के भतीजे हैं और कद्दावर सियासतदां।

इमरान ने सन् 2007 में कैबिनेट मंत्री रहे जगदीश राणा को मुजफ्फराबाद विधानसभा सीट पर परास्त कि या था। उनके राजनीतिक जीवन की यह बड़ी उपलब्धि थी। लेकिन, इसके बाद मतदाताओं ने भले साथ दिया हो, किस्मत ने इमरान का साथ नहीं दिया। दरअसल, थोड़े-थोड़ मतों के अंतर से वह लगातार चार चुनाव हार चुके हैं लेकिन, हौसला नहीं।

इसमें कोई शक नहीं कि सहारनपुर की सियासत इमरान के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। अब जबकि विस चुनाव बिल्कुल नजदीक है तो इमरान मसूद फिर सुर्खियों में हैं। फिलवक्त, इमरान कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और दिल्ली के इसी पार्टी के प्रभारी हैं।

अब उनके सपा में शामिल होने की चर्चाएं परवान चढ़ चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों इमरान की लखनऊ में सपा मुखिया अखिलेश यादव से भेंट हुई और तय पाया गया है कि इमरान को सपा में शामिल किया जाएगा।

सियासी टीकाकारों का कहना है कि इमरान के सपा में शामिल होने पर सहारनपुर के सियासी समीकरण बदले बिना नहीं रहेंगे। मुस्लिम समाज में इमरान की मजबूत पकड़ अब भी है। ऐसे में वह सभी सीटों को प्रभावित तो करेंगे कितुं इसका लाभ भाजपा को मिलेगा। याद कीजिए, सन 2014 का लोकसभा चुनाव। इस दफा इमरान का नरेंद्र मोदी को बोटी-बोटी करने का कथित बयान वायरल हुआ और टीवी चैनलों ने इसे खूब दिखाया।

नतीजा रहा कि चुनाव हिंदू-मुस्लिम में विभक्त हो गया और सहारनपुर लोकसभा सीट से भाजपा के राघव लखन पाल ने दिल्ली की डगर आसान की जबकि चार लाख से ज्यादा वोट हासिल करने पर भी इमरान चुनाव हार गए। यही नहीं, सन 2019 में कांग्रेस के टिकट पर सहारनपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके इमरान मसूद तीसरे स्थान पर रहे।

इसके पहले 2012 और 2017 के विस चुनावों में नकुड़ सीट पर इमरान मसूद को डाक्टर धर्म सिंह सैनी के सामने मुंह की खानी पड़ी। जानकारों का कहना है कि इमरान के सपा में जाने पर एक धड़ा अंदरखाने काट करने से बाज नहीं आएगा। वहीं, भाजपा को मतों के ध्रुवीकरण का पूरा लाभ होगा।

सियासी पंडितों का कहना है कि इमरान के आने से हरसीट पर हिंदू वोटर लामबंद हो सकते हैं। अब कुछ भी हो इमरान के पाला बदलने की चर्चाओं के बीच सियासी प्याले में तूफान उठ गया है।

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