Wednesday, February 11, 2026
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रूस-यूक्रेन युद्ध: यूरोप के सबसे बड़े परमाणु बिजली संयंत्र में आग, देखें वीडियो

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: जंग के बीच यूक्रेन के जापोरीझझया स्थित यूरोप के सबसे बड़े परमाणु बिजली घर में आग लग गई है। खबरों में कहा गया है कि इस पर यदि जल्द काबू नहीं पाया गया तो चेर्नोबिल हादसे से 10 गुना बड़ा हादसा हो सकता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के कार्यालय प्रमुख के सलाहकार ने इस आग का वीडियो ट्वीट कर चेताया है।

यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु बिजली घर यूक्रेन में जापोरीझझया प्रांत के एनरहोदर शहर में है। यहां रूस ने बड़ा हमला किया है। यूक्रेन के अधिकारी का दावा है कि रूसी हमले के बाद जापोरीझझया परमाणु ऊर्जा केंद्र से धुएं के गुबार उठते दिखाई दे रहे हैं। इस जंग में फिर से परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ गया है। यूक्रेन पर हमले के वक्त से ही यूक्रेन के परमाणु ऊर्जा केंद्र रूस के निशाने पर हैं।

खबरों में कहा गया है कि इस संयंत्र से धुएं के गुबार उठते दिखाई दे रहे हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने आग लगने के बाद रूसी सैनिकों से इस संयंत्र पर हमला बंद करने को कहा है। कुलेबा ने ट्वीट किया, ‘अगर यह उड़ा, तो यह चेर्नोबिल हादसे से 10 गुना बड़ा धमाका होगा! रूसियों को तुरंत इस पर हमले रोकना चाहिए।’ रूसी फौजों ने यूक्रेन के एनरहोदर शहर पर बमबारी की। इसकी चपेट में यह संयंत्र भी आ गया।

इस संयंत्र में छह परमाणु रिएक्टर हैं। ये पूरे यूरोप में सबसे बड़ा और विश्व का नवां सबसे बड़ा रिएक्टर माना जाता है। खबरों में कहा गया है कि रूसी सेना इस इलाके में मोर्टार और आरपीजी से हमला कर रही हैं। परमाणु बिजली घर के कुछ हिस्सों में फिलहाल आग लगी हुई है। रूसी फौजों ने अग्नि शमन दल के कर्मचारियों पर भी गोलीबारी की है।

36 साल पहले 26 अप्रैल 1986 को तत्कालीन सोवियत संघ के चेर्नोबिल के न्यूक्लियर पावर प्लांट में भयानक विस्फोट हुआ था। यह धमाका इतना विनाशकारी था कि कुछ ही घंटे में यहां काम करने वाले 32 कर्मचारियों की मौत हो गई थी जबकि न्यूक्लियर रेडिएशन से सैकड़ों कर्मचारी बुरी तरह जल गए थे। सोवियत संघ द्वारा इस हादसे को दुनिया से छिपाने की कोशिश गई। लेकिन स्वीडन सरकार की एक रिपोर्ट के बाद तत्कालीन सोवियत संघ ने इस हादसे को माना था। सोवियत संघ के बंटवारे के बाद चेर्नोबिल यूक्रेन में आ गया।

चेर्नोबिल न्यूक्लियर प्लांट में खराबी आने की वजह से हादसा हुआ था। इस भीषण हादसे में संयंत्र की छत उड़ गई थी और रेडिएशन काफी दूर तक फैल गया था। दरअसल 26 अप्रैल को न्यूक्लियर पावर प्लांट में एक जांच की जानी थी। इस जांच के दौरान ही प्लांट में भीषण विस्फोट हुआ था। वैज्ञानिक एक इलेक्ट्रिकल सिस्टम की जांच कर यह पता लगाना चाहते थे कि बिजली सप्लाई बंद होने के बाद रिएक्टर के उपकरण काम करते हैं या नहीं।

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