Thursday, March 5, 2026
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Rajasthan News: जयपुर SMS अस्पताल के आईसीयू में भीषण आग, लापरवाही से 7 मरीजों की मौत, परिजनों में भारी आक्रोश

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में सोमवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। अस्पताल के न्यूरो आईसीयू वार्ड में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई, जिसमें अब तक सात मरीजों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। कई गंभीर मरीजों को फायर ब्रिगेड की मदद से बाहर निकाला गया है। इस हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठने लगे हैं।

हादसा कब और कहां हुआ?

जानकारी के मुताबिक, रात करीब 12:30 बजे ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो आईसीयू वार्ड के स्टोर रूम में आग लगी। स्टोर में कागजात, आईसीयू में इस्तेमाल होने वाला मेडिकल सामान और ब्लड सैंपलर ट्यूब रखे हुए थे। हादसे के वक्त आईसीयू में 11 मरीज भर्ती थे, जबकि पास के दूसरे आईसीयू में 13 मरीज मौजूद थे। आग लगने के बाद धुआं पूरे वार्ड में फैल गया, जिससे दम घुटने की वजह से कई मरीजों की जान चली गई।

परिजनों के गंभीर आरोप

हादसे के बाद अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। परिजनों का कहना है कि आग लगने के बाद अस्पताल का स्टाफ मौके से भाग गया और मरीजों की मदद के लिए कोई मौजूद नहीं था। तीमारदारों ने बताया कि उन्होंने कई बार धुएं और बदबू की शिकायत की, लेकिन अस्पताल कर्मियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया।

एक परिजन ने कहा, “हमने तीन-चार बार अंदर धुआं फैलने की जानकारी दी, लेकिन कर्मचारियों ने कहा कि चाभी आ रही है, बाद में देखेंगे। जब तक कुछ किया जाता, बहुत देर हो चुकी थी।”

डॉक्टर और स्टाफ मौके से फरार

हादसे के समय वहां कोई डॉक्टर या कंपाउंडर मौजूद नहीं था। परिजनों ने दावा किया कि जैसे ही धुआं फैला, मेडिकल स्टाफ भाग खड़ा हुआ। मौके पर केवल पुलिसकर्मी पहुंचे और उन्होंने कुछ मरीजों को बाहर निकालने में मदद की। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने गेट तक नहीं खोला, जिससे बचाव कार्य में देरी हुई।

आग बुझाने के इंतजाम नहीं थे

परिजनों का कहना है कि अस्पताल में आग बुझाने की कोई व्यवस्था नहीं थी। एक मरीज के रिश्तेदार नरेंद्र सिंह ने कहा, “मैं नीचे खाना खाने गया था। जब वापस आया तो आग लग चुकी थी। मेरी मां अंदर थीं, लेकिन कोई मदद करने वाला नहीं था।”

एक अन्य परिजन ओम प्रकाश ने बताया कि जब उन्होंने धुआं देखा तो डॉक्टरों को चेताया, लेकिन डॉक्टर और कंपाउंडर पहले ही भाग चुके थे।

लापरवाही पर उठे सवाल

घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका कहना है कि सरकार और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से यह हादसा हुआ है। सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े सरकारी अस्पताल में फायर सेफ्टी के इंतजाम क्यों नहीं थे, और इतनी बड़ी चूक के बाद भी अब तक किसी पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

सरकारी चुप्पी और परिजनों का गुस्सा

घटना के कई घंटे बीत जाने के बावजूद अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है। मृतकों के परिजनों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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