Sunday, April 5, 2026
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गजब: नाला निर्माण के नाम पर बड़ा खेल

  • आड़ा-तिरछा किया निर्माण, सफाई में होगी दिक्कत
  • पहले बने चौड़े-खुले नाले, अब बनाये कवर्ड नाले

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: निर्माण करने से पहले ही जब इस बात का हिसाब लगा लिया जायेगा कि किस अधिकारी को कितना कमीशन देना है और किस बाबू को कितना नजराना पहुंचाना है। फिर आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि निर्माण कार्य में किस स्तर की सामग्री का प्रयोग किया जायेगा। हां, कागजी किलेबंदी में माहिर अधिकारी इस बात का खास ध्यान रखेंगे कि लिखापढ़ी में जो निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री का उल्लेख किया गया है। वास्तव में निर्माण उसके इतर निम्न स्तर का होगा। चौड़ाई कागजों में कुछ और दर्शित होगी तो मौके पर कुछ और ही आकार दे दिया जायेगा।

इस खेल में अपनी सुविधा के अनुसार निर्माण किया जायेगा। चाहे इसके लिए आड़ा तिरछा निर्माण हो जाये। या फिर निर्माण के बाद सफाई कार्य में बाधा आये, ठेकेदार और कार्यदायी संस्था को इससे सरोकार नहीं होगा। एक और बड़ा खेल इस निर्माण में यह किया जा रहा है कि पहले जो चौड़े नाले बने हुए थे, उनके स्थान पर अब छोटे और कवर्ड नाले बनाये जा रहे हैं। इससे खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ठेकेदार की कितना आला स्तर पर सेटिंग है।

जगह-जगह सरकारी भवनों व नालियों के गिरने से दुर्घटनाएं होने के तमाम मामले सामने आने के बावजूद विभागीय अधिकारियों का ध्यान निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नहीं है। सरकारी धन का बंदरबांट करने की नीयत से अधिकारियों ने ठेकेदारों को खुली छूट दे रखी है। आम जनता व पार्षदों के विरोध के बावजूद अधिकारी कार्यों की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दे रहे हैं जिससे आक्रोश पनप रहा है। ताजा मामला शहर में नालों के निर्माण में चल रहा है। इसमें निर्माण कार्य में तो निम्न स्तर की सामग्री प्रयुक्त की जा रही है। साथ ही मानक के अनुसार निर्माण कार्य भी नहीं कराया जा रहा है।

गणेशपुरी में टेढा-मेढा बना दिया गया है नाला

नगर निगम की ओर से गणेश पुरी मेन रोड पर एक साइड में नये नाले का निर्माण किया गया है। वार्ड-2 के अन्तर्गत आने वाले इस क्षेत्र में सिर्फ एक साइड के ही नये नाले का निर्माण किया गया है। दो वर्ष पूर्व यहां सड़क निर्माण के साथ ही नाला बनाया गया था। लेकिन अब पुरानी र्इंटों को उखाड़कर आरसीसी का नाला बनाया जा रहा है। यह नाला टेढ़ा-मेढ़ा बना दिया गया है। गणेशपुरी में खत्ते के ठीक सामने पुलिया के साथ ही नाले को टेढ़ा कर दिया गया है।

इसके बाद कब्रिस्तान मियां मौहम्मद नगर के पास इस नाले को टेढ़ा-मेढ़ा कर दिया गया है। यहां जिस जगह नाले का निर्माण चल रहा है। वहां ट्रांसफार्मर रखा हुआ है। ठेकेदार ने यह खेल कर दिया कि जितनी जगह ट्रांसफार्मर रखा हुआ है। उस स्थान को ऐसे ही छोड़ दिया तथा आगे और पीछे संकरा नाला बना दिया है। आगे यह नाला कब्रिस्तान से पांच फिट जगह छोड़कर फिर टेढा कर दिया गय है। इसके बाद नाले में फिर घुमाव देकर इसको अपनी सुविधा के अनुसार टेढ़ा-मेढा करके निर्माण कार्य की खानापूर्ति कर दी गई है।

शास्त्रीनगर में हाइटेंशन खंभों के बीच बनाया नाला

नाले के निर्माण में इतनी लापरवाही बरती गई कि हाइटेंशन लाइन के खंभों को वहां से शिफ्ट नहीं कराया गया. नाला निर्माण के बाद जब इस नाले मे पानी चलेगा तो लोहे के खंभे से न केवल नाले के पानी बल्कि आसपास बने घरों में भी करंट उतर सकता है, जिसे हादसे का सबब बनते देर नहीं लगेगी। नाले के बीचोंबीच खंभे दरअसल शास्त्रीनगर आवास विकास चौराहे से आरटीओ पुलिया तक नाला निर्माण का काम पिछले माह से जारी है।

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इसके तहत नाले के चौड़ीकरण का काम किया गया है। इस नाले के निर्माण के लिए रोड साइड मकानों व दुकानों के रैंप तोड़ दिए गए ताकि नाला को चौड़ा किया जा सके। लेकिन इसे ठेकेदार की लापरवाही कहें या जल्दबाजी, जिसके चलते आवास विकास चौराहे से आरटीओ कार्यालय तक ठेकेदार ने नाले की चौड़ाई कुछ इस तरह बढ़ाई है कि रोड साइड डेढ़ किमी लंबी एचटी लाइन वाले बिजली के सभी खंभे नाले के बीचोंबीच आ गए हैं

खंभे भी एक-दो नहीं पूरे 22 हैं। नाला निर्माण न तो बिजली के खंभों से बचाते हुए किया गया और न ही बिजली विभाग से बिजली के खंभे शिफ्ट कराने का पत्राचार किया गया। नगर निगम के निर्माण विभाग द्वारा आवास विकास से आरटीओ पुलिया तक रोड के दोनो साइड नाले का निर्माण में करीब एक करोड़ ऊपर ही एबीसी के बिल का काम किया।

नंदन के पास संकरा कर दिया गया है नया नाला

नगर निगम की ओर से गढ़ रोड पर नंदन सिनेमा के पास से नये नाले का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें सबसे बड़ा खेल यह किया गया है कि नाले की चौड़ाई अपनी मर्जी से कम कर दी गई है। पहले यह नाला पांच फिट चौड़ा था। अब इसकी चौड़ाई घटाकर महज साढ़े तीन फिट चौड़ा ही कर दिया गया है। नाले की गहराई भी महज चार फिट गहरी रखी जा रही है।

जबकि यहां कम से कम छह फिट तक की गहराई रखी जानी चाहिए थी। ताकि यदि पानी का बहाव हो तो जल निकासी तेजी से हो सके। यहां भी ठेकेदार ने अपनी मनमर्जी से चलाते हुए नाले को टेढा-मेढा करने का काम शुरू कर दिया है। अभी निर्माण कार्य दस फिट की जगह में ही किया जा रहा है, लेकिन खुदाई 30 फिट तक की कई दी गई है।

सड़क पर ही डाल दी निर्माण में प्रयुक्त सामग्री

इंदिरा चौक से लेकर हापुड़ रोड पर ईवज चौराहे पर भी इन दिनों नाला निर्माण का कार्य चल रहा है! ठेकेदार ने पुराने नाले को तोड़कर उसके स्थान पर नया नाला बनाने का कार्य शुरू कर रखा है। डेढ माह से अधिक समय से यह कार्य चल रहा है। ठेकेदार ने पहले तो पुराने नाले से सारी सिल्ट निकालकर सड़क पर डाल दी थी। अब उसने नाला निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री भी सड़क पर ही डलवा दी है। इससे सड़क पर इतना भी रास्ता नहीं बचा है कि पैदल भी इधर से गुजरा जा सके। यह तो मुख्य सड़क की हालत है!

इस निर्माण कार्य की धीमी गति से यहां सुबह से लेकर रात तक जाम लग रहा है। बस या ट्रक आने से तो इतनी बुरी हालत हो जाती है कि यहां से पैदल भी नही निकला जा सकता है। इसी तरह नई सड़क शास्त्री नगर के पास भी नाला निर्माण का कार्य चल रहा है! यहां भी ठेकेदार ने नाले की सिल्ट निकालकर सड़क पर डाल दी है। यहां भी ठेकेदार ने भी नये निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री सड़क पर डलवा दी है।

निगम के संसाधनों का किया जाता है प्रयोग

नाला निर्माण के लिए नगर निगम की जेसीबी से खुदाई कराने के साथ ही नगर निगम के टैंकर से ठेकेदार द्वारा पानी की व्यवस्था की गई है। नाला निर्माण में दोयम दर्जे की ईंट के अलावा सफेद बालू व सीमेंट की कम मात्रा इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है। साथ ही नाले को सीधा न बनाकर जगह-जगह टेढ़ा कर दिया गया है। घटिया निर्माण का विरोध मोहल्ले वासियों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों द्वारा किया जा रहा है लेकिन नगर निगम के अभियंता व अधिशासी अधिकारी निर्माण कार्य की जांच तक करने नहीं पहुंच रहे हैं। जबकि नगर निगम में अभियंताओं की भारी भरकम फौज है।

अधिकारियों द्वारा कमीशन व ठेकेदार द्वारा ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में गुणवत्ता को दरकिनार कर दिया जाता है। पूर्व पार्षद व कार्यकारिणी सदस्य अफजाल सैफी ने बताया कि 1076 पर फोन कर मुख्यमंत्री पोर्टल पर मामले की शिकायत भी दर्ज कराई गई। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। निर्माण कार्य की जांच कराकर गुणवत्तापूर्ण तरीके से नाली का निर्माण किया जाए। साथ ही नाली को सीधा बनाया जाए ताकि पानी की निकासी हो सके। ऐसा न होने पर उन्होंने धरना-प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है।

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