जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: लंका के दक्षिणी तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत पर हमला किया, जिससे 87 लोग मारे गए। इस हमले के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को खुली चेतावनी दी है।
अब्बास अराघची की चेतावनी, अमेरिका को पछताना पड़ेगा
अब्बास अराघची ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अमेरिका ने ईरान के तट से 2,000 मील दूर समुद्र में एक जघन्य अपराध किया है। उन्होंने भारतीय नौसेना के मेहमानों को ले जा रहे फ्रिगेट ‘डेना’ पर हमला किया, जो अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना चेतावनी के हुआ।” उन्होंने चेतावनी दी, ‘अमेरिका को इस कृत्य पर गहरा पछतावा होगा’
हमला कब हुआ?
4 मार्च की तड़के, हिंद महासागर में ईरान की नौसेना का फ्रिगेट ‘आईआरआईएस डेना’ श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास डूब गया। यह घटना अमेरिका-इस्राइल-ईरान युद्ध के बीच गहरे समुद्री क्षेत्र में हुई पहली बड़ी नौसैनिक घटना मानी जा रही है। इस हमले से भारत के समुद्री क्षेत्र तक संघर्ष फैलने की आशंका जताई जा रही है।
जहाज की स्थिति और श्रीलंकाई जानकारी
श्रीलंका के गाले शहर से 40 नॉटिकल मील दक्षिण में यह जहाज डूबा। जानकारी के अनुसार, यह जहाज हाल ही में विशाखापत्तनम में आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास MILAN 2026 और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के बाद अपने देश लौट रहा था।
श्रीलंकाई नौसेना और रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह हमला पनडुब्बी से दागे गए टॉरपीडो से किया गया। स्थानीय समय के अनुसार, सुबह 5:08 से 5:30 बजे के बीच जहाज से संकट संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें बड़े विस्फोट से जहाज को भारी नुकसान और पानी भरने की जानकारी दी गई। कुछ ही मिनटों में जहाज रडार से गायब हो गया और डूब गया।
अमेरिका का बयान और बचाव कार्य
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि की और बताया कि अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो से इस युद्धपोत को निशाना बनाया गया।
गाले के अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, अब तक 87 शव बरामद किए गए हैं, और 32 नाविकों को बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, जहाज पर सवार करीब 180 लोगों में से 60 लोग अब भी लापता हैं।

