
कभी किताबें हमें चुनती हैं और कभी हम किताबों को चुनते हैं। चुनने की इस प्रक्रिया में संयोगों का भी बड़ा महत्व है। यह संयोग हो सकता है कि आपका परिवेश साहित्यिक हो…किशोरावस्था से ही आपको ऐसे मित्र मिलें, जिनकी साहित्यिक रुचियां हों। एक संयोग यह भी हो सकता है कि आपके घर में ही पुस्तकालय हो, जिसमें आप बच्चों से लेकर बड़ों तक की किताबें देख और पढ़ सकें। किशोरावस्था में शब्द और किताबों से बनने वाला रिश्ता धीरे-धीरे परिपक्व होता रहता है। इस बीच आपके लिए बहुत-सी नई खिड़कियां-दुनियाएं- खुलती हैं- सिनेमा की दुनिया…विश्व साहित्य की दुनिया…मनुष्य के व्यवहार की दुनिया…प्रकृति और परिवेश की दुनिया…बादलों और बारिश की दुनिया…।