- पूर्व में मेरठ में 35 करोड़ की नकली किताबें पकड़ी गई थी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: बुक इंडस्ट्री में एक कहावत आम हो चली है कि अगर प्रदेश में कहीं भी एनसीईआरटी की नकली किताबेंं पकड़ी जाएंगी, उसके तार मेरठ से जरूर जुड़े होंगे। बरेली के भोजीपुरा थाने की एक कागज फैक्ट्री में पकड़ी गई लाखों की कीमत की किताबों के मामले में मेरठ के तार जुड़ने की संभावना है। माना जा रहा है कि भाजपा के कुछ नेताओं के नाम जुड़े हो सकते हैं। इसकी जांच एसटीएफ कर रही है।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की करोड़ों रुपये की नकली किताबों के पकड़े जाने के बाद इस अवैध कारोबार में यहां भी कई पुस्तक विक्रेताओं के तार मेरठ के इन कारोबारियों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। बताते हैं कि सही से जांच और छापे डाले जाएं तो यहां भी चौंकाने वाला खुलासा हो सकता है। मेरठ और गजरौला में एनसीईआरटी की करोड़ों की नकली किताबें बरामद हुई थीं।
तीन सितंबर 2020 को परतापुर में पकड़ी गई 35 करोड़ की एनसीआरटी किताबें पकड़ी गई थी। इस पर भाजपा ने नेता को निलंबित कर दिया था। इनका बेटा सचिन गुप्ता 35 करोड़ रुपये की एनसीईआरटी की किताबों की डुप्लीकेट बरामद हुई थी। सचिन गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। सचिन गुप्ता परतापुर के अछोंडा में एक गोदाम का और मोहकमपुर में एक प्रिंटिंग प्रेस का मालिक है।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली सहित सात राज्यों में डुप्लीकेट किताबें छापी और आपूर्ति की गई थीं। फर्जी एनसीईआरटी की किताबें लगभग 364 प्रकार की थीं, जिनमें कक्षा नौवीं से 12वीं तक की भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित की किताबें शामिल थीं। एसटीएफ ने परतापुर क्षेत्र में भाजपा नेता संजीव गुप्ता के गोदाम पर छापा मारते हुए एनसीईआरटी की करीब 8.50 लाख से ज्यादा नकली किताबें बरामद की हैं। वहीं, करीब नौ लाख किताबें गजरौला में बरामद की गईं।
लगातार छापे, नेटवर्क नहीं तोड़ा
मेरठ में एनसीईआरटी की नकली किताबें पहले भी पकड़ी जा चुकी हैं। साल 2013 में क्राइम ब्रांच ने कोतवाली क्षेत्र के गोलाकुआं व लिसाड़ीगेट के पास राशिद वाली गली में दो स्थानों पर छापा मारकर नकली किताबें पकड़ी थीं।