Saturday, March 7, 2026
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राम मंदिर की पहली ईंट रखने वाले कामेश्वर बन सकते हैं बिहार के डिप्टी सीएम

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: बिहार में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के साथ ही सरकार गठन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। आज एनडीए नेताओं की बैठक होने वाली है। जिसमें मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार के नाम का एलान हो सकता है। वहीं सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की पहली ईंट रखने वाले कामेश्वर चौपाल को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। खुद को लेकर जारी अटकलों पर चौपाल ने कहा कि मैं पार्टी का कार्यकर्ता हूं, पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी वो मुझे स्वीकार है।

कौन हैं कामेश्वर चौपाल

कामेश्वर चौपाल दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। 1989 के राम मंदिर आंदोलन के समय हुए शिलान्यास में कामेश्वर ने ही राम मंदिर की पहली ईंट रखी थी। संघ ने उन्हें पहले कारसेवक का दर्जा दिया है। वह 1991 में रामविलास पासवान के खिलाफ चुनाव भी लड़ चुके हैं। वे बिहार के सुपौल जिले के रहने वाले हैं जो मिथिला में पड़ता है।

एक मैग्जीन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, कामेश्वर चौपाल ने बताया था कि हम लोग जब बड़े हो रहे थे तो राम को अपना रिश्तेदार मानते थे। उनके मुताबिक मिथिला इलाके में शादी के दौरान वर-वधू को राम-सीता के प्रतीकात्मक रूप में देखने की प्रथा है। ऐसा इसलिए क्योंकि मिथिला को सीता का घर कहा जाता है।

कामेश्वर ने अपनी पढ़ाई-लिखाई मधुबनी जिले से की है। यहीं वे संघ के संपर्क में आए थे। उनके एक अध्यापक संघ के कार्यकर्ता हुआ करते थे। संघ से जुड़े उसी अध्यापक की मदद से कामेश्वर को कॉलेज में दाखिला मिला था। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही वे संघ के प्रति पूरी तरह से समर्पित हो चुके थे। इसके बाद उन्हें मुधबनी जिले का जिला प्रचारक बना दिया गया था।

राम मंदिर शिलान्यास में रखी थी पहली ईंट

नवंबर 1989 में राम मंदिर के शिलान्यास का कार्यक्रम रखा गया। उस समय कामेश्वर चौपाल अयोध्या में ही मौजूद थे। वे एक टेंट मे रह रहे थे। उनके कमरे में अशोक सिंघल के एक करीबी व्यक्ति आए और उन्हें बताया कि आपको शिलान्यास के लिए चुना गया है। उन्होंने ही राम के मंदिर निर्माण की पहली ईंट रखी थी।

ऐसा रहा है राजनीतिक करियर

कामेश्वर चौपाल ने 1991 में लोक जनशक्ति पार्टी के दिवंगत नेता रामविलास पासवान के खिलाफ चुनाव लड़ा था। हालांकि वे हार गए थे। 2002 में वे बिहार विधान परिषद के सदस्य बने। 2014 में भाजपा ने उन्हें पप्पू यादव की पत्नी रंजीता रंजन के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था। लेकिन यहां भी उन्हें कामयाबी नहीं मिली।

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