- शुकतीर्थ संक्षिप्त परिचय पुस्तक के बारहवें संस्करण का हुआ विमोचन
जनवाणी संवाददाता |
मोरना: भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ के स्वामी कल्याणदेव हैलीपैड प्रांगण में बने भव्य पांडाल में राजस्थान के भक्तों द्वारा आयोजित भागवत कथा का पीठाधीस्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर आशीर्वचन करते हुए उन्होंने कहा कि किसी चीज को प्राप्त करना उतना कठिन नहीं है जितना प्राप्त वस्तु का सदुपयोग करना है। वास्तव में वही लोग धन्य हैं जो अपने तन, मन, धन, विद्या, वाणी, बुद्धि और समय का सदुपयोग लोक कल्याण के कार्यों में करते हैं। भागवत एक पारमार्थिक यज्ञ है।

भागवत मोक्ष और जीवन दायिनी है तथा भगवान वेदव्यास जी की ओर से सम्पूर्ण मानव जाति को एक वरदान एवं उपहार है। भागवत सर्वोच्च जीवन जीने का दर्शन तथा पाप कर्मों से विमुक्ति का साधन है। भागवत जीवन में परिवर्तन लाकर लोक-परलोक को सुधारती है तथा जीवन और मृत्यु के सत्य का बोध कराती है। धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में भारत विश्व में सबसे महान है। भारत आध्यात्मिक ज्ञान का प्रकाश पुंज है।
भारत के पास भगवान राम और कृष्ण नाम की संजीवनी है। इससे पूर्व महाराज श्री ने भागवत पोथी पूजन तथा कथाव्यास दिग्विजय राम महाराज तथा राजस्थान से पधारे संत रमता राम महाराज का सम्मान किया। कथा यजमानों का भी अभिवादन किया। कथा में राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र दिल्ली तथा अन्य प्रांतों से पधारे हजारों श्रद्धालु पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इसी अवसर पर भागवत पीठ शुकतीर्थ के इतिहास पर आधारित शुकतीर्थ संक्षिप्त परिचय के बारहवें संस्करण का विमोचन हुआ।

