
वैज्ञानिकों का कहना है कि कोयल, लड़ाकू पक्षी है, वह कौवे को डरा-धमकाकर अपनी मादा के अंडे-कौवे के घोसले में रखवा देता है और बेचारा कौवा, कोयल के डर से उसके अंडे-बच्चे सेता है। कोयल एक ऋतु में 16 से 26 अंडे दे सकती है। फिनलैंण्ड में पाया जाने वाला कोयल कुल पक्षी की मादा अपना अंडा छोटा-बड़ा कर लेती है।
पक्षियों की दुनिया में कई पक्षी ऐसे हैं, जो न तो घोसला बनाते हैं, न अपने बच्चे पालते हैं। इनके अंडे दूसरे पक्षी द्वारा सेये जाते हैं और बच्चे पाले जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार पक्षी वर्ग के पांच परिवार , एनाटिडी; कुकुलिड़ि; इन्डिकेटोरिडि तथा प्लीसिडि वर्ग के पक्षी अपने अंडे चोरी, चुपके या डरा धमकाकर दूसरों के घोसलों में रख देते हैं और दूसरा पक्षी अनजाने में या भय वश उनके अंडे-बच्चों की देखभाल करता है। इस प्रक्रिया को ब्रुड परजीवीकरण कहते हैं। ऐसा अस्सी प्रजातियों के पक्षी करते हैं, जिसमें 40 प्रजातियां कोयल की है।
आपको यह तो मालूम होगा ही कि कोयल पक्षी न तो अपना घोंसला बनाता है न अपने बच्चे पालता है। जनवरी-फरवरी से लेकर मई-जून तक नर कोयल, बागों में पेड़ों में बैठा कुहू कुहू गाता रहता है। यह प्रवासी पक्षी मादा को रिझाने के लिए गाता। तुम्हें ये भी बताते चलें कि केवल नर कोयल ही गीत गाता है मादा चुपचाप श्रोता बनकर सुनती हैं। जब मादा कोयल के अंडे देने का समय जुलाई में आता है तो यह अपने अंडे चुपके से कौवे के घोसले में या मैगपाई चिड़िया के घोसले में रख आती है। अंडों का रंग एक होने के कारण कौवनियां उन्हें पहचान नहीं पाती हैं।
बच्चों का रंग भी कौवे के बच्चों से मिलता है, इस कारण जब तक कौवे व कोयल के बच्चे बोलने नहीं लगते हैं अपने को चालाक समझने वाला कौवा यह भेद नहीं कर पाता कि कौन कौवेला है और कौन कोयल। दूसरी तरफ वैज्ञानिकों का कहना है कि कोयल, लड़ाकू पक्षी है, वह कौवे को डरा-धमकाकर अपनी मादा के अंडे-कौवे के घोसले में रखवा देता है और बेचारा कौवा, कोयल के डर से उसके अंडे-बच्चे सेता है।
कोयल एक ऋतु में 16 से 26 अंडे दे सकती है। फिनलैंण्ड में पाया जाने वाला कोयल कुल पक्षी की मादा अपना अंडा छोटा-बड़ा कर लेती है। जब यह कोयल रेड स्टार्ट तथा विनचिट पक्षी के घोसले में अंडा रखती है तो अंडे को छोटा कर देती है तथा अंडे का रंग नीला होता हैं अंडे से निकले अधिकांश पक्षियों के बच्चे पहले अंधे जैसे होते है और अपने पोषक पक्षी के बच्चों को घोसले से गिरा देते हैं।
हनी गाइड नाम का पक्षी बार्वेट या कठफोड़वा जैसे तेज-तर्रार पक्षियों के घोसलों में कब्जा करके अपने अंडे रखता है। जर्मनी में पाया जाने वाला ब्रुड वार्बलर (फाइलोस्कापस सिविलेटरिक्स) पक्षी अपने घोसले में कोयल के अंडे रखे देख, अपने अंडे भी छोड़कर घोसला छोड़कर भाग जाता है। यूरोप में पाई जाने वाली कोयल (कुकुलस केनोरस) भी दूसरे पक्षियों के घोसले में अंडे देती है।
यह कोयल शाम को पोषक पक्षी के लौटने के पहले ही उसके घोसले में अंडा रख आती है और उसका अंडा फेंक आती है उत्तरी अमेरिका में मेलोथर्स नाम का पक्षी पाया जाता है। यह पक्षी अक्सर अपने अंडे ओभन (सी पूरस आॅरोकैपिलस) चिड़िया के घोंसले में अपने अंडे वैक्स बिलफ्रिन्च पक्षियों के घोसले में दे देती है। दक्षिण अमेरिका व अफ्रीका में पाई जाने वाली बतखें भी अपने अंडे दूसरों के घोसलों में रख आती हैं।
तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि तुम्हारे घरों में रहने वाली सीधी-सादी गौरैया भी कभी-कभार क्लिफ्स्वैलो (पैकैनिडान पायरोनोटा) फुदकी चिड़िया के घोसले में कब्जा कर अपने अंडे रखती व सेती है। ये पक्षी अपना अंडा रखते समय पोषक पक्षी के अंडे बाहर फेंक देते हैं ताकि गिनती की भूल भुलैया में पोषक पक्षी के अण्डे गिनती से ज्यादा न निकलें।
जंगलों में पिऊ पिऊ की रट लगाने वाला पपीहा पक्षी भी अपने अण्डे चिलचिल बैवलर पक्षी के घोंसले में रख आता है। बेचारे चिलचिल पक्षी की मादा कई बार तो कई कई पक्षियों के अंडे सेती व बच्चे पालती है।
शिवचरण चौहान
