- फरार हाजी पर घोषित है पचास हजार रुपये का इनाम
जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: यूपी में किसी समय खनन माफिया हाजी का इकबाल इतना बुलंद था कि बड़े-बड़े अफसर भी इसके सामने पसीना छोड़ देते थे। खनन की काली कमाई से हाजी इकबाल ने बड़ा साम्राज्य स्थापित कर लिया था। राजनीति में भी उसकी दखलंदाजी चल रही थी। बसपा सरकार में हाजी के एक इशारे पर अधिकारियों के तबादले तक हो जाते थे। लेकिन, भाजपा सरकार में हाजी इकबाल की मानो शामत आ गई है। आज हाजी इकबाल पर 50 हजार का इनाम घोषित हो चुका है।
खनन की बात करें तो पूर्व बसपा एमएलसी हाजी इकबाल का नाम सबसे पहले आता है। सहारनपुर के खनन कारोबार को लेकर हाजी इकबाल अक्सर चर्चाओं में रहने वाला नाम है। यह अलग बात है कि आज तक हाजी इकबाल के नाम से कोई खनन पट्टा तक नहीं है लेकिन बसपा से लेकर सपा सरकार तक में हाजी इकबाल का खनन का काम कभी रुका नहीं। सन 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद हाजी इकबाल पर शिकंजा कसना शुरू हुआ है। अब तक इकबाल की 125 करोड़ रुपए की संपत्ति सीज की जा चुकी है। इस संपत्ति को गैंगस्टर एक्ट में कुर्क किया गया है। उत्तर प्रदेश में अब तक गैंगस्टर एक्ट के तहत यह सबसे बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है। आज से करीब दो दशक पूर्व हाजी इकबाल मिजार्पुर क्षेत्र में परचून की दुकान किया करता था।
इसके बाद हाजी इकबाल ने वन तस्करी शुरू की और खैर की लकड़ी की तस्करी करना शुरू कर दिया। उस समय हाजी इकबाल के खिलाफ कुछ मुकदमे भी दर्ज हुए थे। इसके बाद करीब 15 साल में हाजी इकबाल ने अपना इतना बड़ा नेटवर्क खड़ा कर दिया और सहारनपुर में हजारों बीघा में ग्लोकल यूनिवर्सिटी भी बना दी। तमाम बेनामी संपत्तियां खरीद लीं।चीनी मिलों की भी उसने अवैध तरीकेसे खरीदारी की।कई होटल खड़े कर लिए। उसने एक साथ 16-16 अवैध खनन के पट्टे चलाए लेकिन किसी भी कागजात में कभी अपना नाम शामिल नहीं होने दिया। हाजी इकबाल को सबसे बड़ा फायदा बसपा और समाजवादी पार्टी की सरकार में हुआ। बसपा सरकार में हाजी इकबाल को मायावती के एक बेहद करीबी का दाहिना हाथ कहा जाता था। समाजवादी पार्टी की सरकार में भी कभी हाजी इकबाल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एनजीटी ने पहली बार हाजी इकबाल पर वर्ष 2016 में ढाई सौ करोड़ रुपए का जुमार्ना लगाया। हाजी इकबाल ने कभी भी अपना नाम किसी पट्टे में शामिल नहीं किया था ऐसे में जुर्माना एनजीटी ने हाजी इकबाल के भाई और परिवार के अन्य सदस्यों समेत उसके सिंडिकेट पर लगाया। कागजों में भले ही जुमार्ना सिंडिकेट पर लगा हो लेकिन झटका हाजी इकबाल को ही लगा था।

