- एक वेंटिलेटर पर और दूसरा आॅक्सीजन पर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: न्यूटिमा अस्पताल में भर्ती ब्लैक फंगस बीमारी के दोनों मरीजों की हालत नाजुक है। अस्पताल के एमडी डॉक्टर संदीप गर्ग ने बताया कि एक मरीज वेंटिलेटर पर और दूसरा आॅक्सीजन पर है। ब्लैक फंगस के मरीजों की हालत में किसी तरह का सुधार नहीं हुआ है।
डॉक्टर भी इन दोनों मरीजों को लेकर परेशान है कि आखिर इनका ट्रीटमेंट करने के बाद भी सुधार नहीं हो पा रहा है। यह फंगस त्वचा के साथ नाक, फेफड़ों और मस्तिष्क तक को नुकसान पहुंचा सकता है। महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, उड़ीसा और दिल्ली में इसके मरीज मिल चुके हैं। मेरठ के अलावा बिजनौर और मुजफ्फरनगर जनपद में भी इसके मरीज मिल रहे है।
काला फंगस पहले ही हवा और जमीन में मौजूद है, इसे एक तरह से फंफूदी भी कह सकते हैं। दरअसल, कोविड-19 रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही ब्लैक फंगस शुरू होती है। जो भी अब तक मरीज सामने आये है, उनकी कोविड-19 आरटीपीसीआर रिपोर्ट रिगेटिव आने के बाद इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं।
यही नहीं, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाला व्यक्ति से संपर्क में आता है, तो उसके चपेट में आने की आशंका अधिक रहती है। जो मरीज जितने लंबे समय तक अस्पताल में रहेगा और जितनी अधिक उसे स्टेरॉयड, एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाई चलती रहेंगी, उसे इससे खतरा बढ़ता जाएगा।
क्या है ब्लैक फंगस
डा. तनुराज व डा. विरोत्तम तोमर के अनुसार ब्लैक फंगस या म्यूकर माइकोसिस फंगस की वजह से होने वाला दुर्लभ संक्रमण है। इंसान की नाक और बलगम में भी ये पाया जाता है। इससे साइनस, दिमाग, फेफड़े प्रभावित होते हैं। ये शुगर के मरीजों या कम इम्युनिटी वाले लोगों, कैंसर या एड्स के मरीजों के लिए घातक भी हो सकता है। ब्लैक फंगस में मृत्यु दर 50 से 60 प्रतिशत तक होती है।
ये हैं लक्षण
बीमारी में मरीज की नाक का बहना, चेहरे का सूजना, आंखों के पीछे वाले हिस्से में दर्द, खासी, मुंह के न भरने वाले छाले, दातों का हिलना और मसूड़ों में पस पड़ना आदि लक्षण दिखते हैं।?ब्लैक फंगस को अक्सर कोविड के इलाज के दौरान दी गई दवाओं का साइड इफेक्ट माना जाता है।

