Friday, June 5, 2026
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महंगाई बढ़ा सकता है बजट

SAMVAD

21 1वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राजग सरकार की दूसरी पारी का अंतिम पूर्ण बजट देश की संसद में प्रस्तुत कर दिया है। देश की अर्थव्यवस्था को मंदी के दौर से बाहर निकालने के लिए निवेश एवं बचत को बजट के माध्यम से बढ़ावा देकर युवा, किसान एवं एमएसएमई क्षेत्र को समर्थन देने की महती आवश्यकता थी। वैसे तो हर बजट में सरकार विभिन्न क्षेत्रों में बजट आवंटित करती ही है। अलग-अलग क्षेत्रों में आवंटित बजट की मात्रा सरकार की प्राथमिकताओं को परिलक्षित करती है। वर्ष 2023 में कई राज्यों में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों और अगले वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों को देखते हुए हर कोई यह आस लगाए बैठा था कि इस बार का बजट लोकलुभावन घोषणाओं से भरा होगा।

पिछले काफी समय से व्यक्तिगत आय कर की स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं हुआ था, इसलिए इस बजट में आयकर की स्लैब में वृध्दि अपेक्षित थी और वित्त मंत्री महोदया ने नई कर व्यवस्था से आय कर रिटर्न भरने वाले कर दाताओं को कर स्लैब में वृद्धि कर कुछ राहत पहुंचाने का कार्य किया है। अधिकतम सरचार्ज को 47 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया है इससे अधिकतम आयकर की दर घटकर 37 प्रतिशत रह गई है। आयकर की सात स्लैब को घटाकर छ: दरें कर दी गर्इं हैं। आयकर संरचना को अधिक सरल बनाने के लिए इन स्लैब की संख्या को और कम किया जा सकता था। पुरानी व्यवस्था से जो लोग आयकर भर रहे थे उन्हें नई कर व्यवस्था में आयकर स्लैब में वृद्धि का सापेक्षिक लाभ कम होगा।

वर्तमान में आय कर रिटर्न भरने के लिए दो व्यवस्थाएं प्रचलन में हैं। पुरानी व्यवस्था से आयकर रिटर्न भरने वालों को कर बचाने के लिए कुछ वैधानिक छूट के प्रावधानों को सम्मिलित करती है जबकि नई व्यवस्था में कर बचाने के लिए सभी वैधानिक छूट समाप्त कर दी गईं थीं। इन दोनों व्यवस्थाओं के चलते अधिकतर आयकर दाता कर छूट का लाभ उठाने के लिए पुरानी व्यवस्था को ही चुनते थे। अब बाई – डिफॉल्ट नई व्यवस्था से आय कर रिटर्न भरना पडेगा। जिसे अभी भी पुरानी व्यवस्था को उपयोग करना है उसके लिए आवेदन करना होगा। नई व्यवस्था को अपनाने से घरेलू बचत कम हो सकती हैं क्योंकि बचत के लिए प्रोत्साहन नई व्यवस्था में नहीं हैं। महिला सम्मान बचत पत्र के माध्यम से दो वर्ष की अवधि के लिए 7.5 प्रतिशत की ब्याज दर की घोषणा की गई है। डाकघर में फिक्स्ड डिपॉजिट पर 7.2 प्रतिशत की ब्याज दर अभी भी मिल रही है।

विभिन्न प्रकार के करों में छूट देने से सरकार को 35 हजार करोड़ रुपए के राजस्व की हानि होने का अनुमान है। सरकार के द्वारा राजस्व जुटाने के लिए क्या प्रयास किए जाएंगे इस विषय में छिटपुट घोषणाओं के अतिरिक्त कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। विनिवेश से 51 हजार करोड़ हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले वर्ष विनिवेश से 65 हजार करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। स्थानीय स्तर पर म्यूनिस्पल कॉर्पोरेशन को म्यूनिस्प्ल बॉन्ड जारी करने की अनुमति प्रदान की है। किसी भी अर्थव्यवस्था को विकास के पथ पर गति प्रदान करने के लिए बचत और निवेश का बढ़ना अति आवाश्यक है। लेकिन बजट में उपलब्ध आंकड़ों पर एक नजर में बचत और निवेश को आकर्षित करने वाले उपाय दिखाई नहीं पड़ते।

कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र में बजट आवंटन अपर्याप्त है। ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में पिछले वर्ष के बजट आवंटन (734 बिलियन) की तुलना में इस बजट में आवंटन घटाकर (600 बिलियन) कर दिया गया है। यह वर्ष 2017-18 के बाद सबसे कम है। गोबरधन योजना के नाम पर मात्र 10 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। कृषि साख के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2022 तक किसानों की आय दो गुनी करने के वादे के साथ सरकार सत्ता में आई थी, अब किसानों की आय को दो गुना करने पर कोई चर्चा भी नहीं है।
उद्योग के क्षेत्र में भी उद्यमी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए वित्त मंत्री से कुछ ठोस कार्रवाई की अपेक्षा रखे हुए थे। कृषि एवं एमएसएमई सेक्टर में रोजगार वृद्धि की असीम संभावनाएं हैं।

वित्तमंत्री इन क्षेत्रों में सार्वजानिक निवेश बढ़ाकर न केवल आर्थिक वृद्धि को तेज गति प्रदान कर सकती थीं बल्कि युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में महती भूमिका निभा सकती थीं। एमएसएमई सेक्टर को कुछ कर्ज़ गारंटी की घोषणा की गई है। शिक्षा और स्वास्थ के क्षेत्र में भी एकलव्य स्कूलों में कुछ शिक्षक भर्ती करने की घोषणा के अतिरिक्त बजट में कुछ नया नहीं है। युवा शक्ति को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बड़े सार्वजानिक प्रोत्साहन/निवेश की आवश्यकता थी।

बजट में की गर्इं कुछ प्रमुख घोषणाओं में रक्षा बजट को पिछले वर्ष के 5.25 लाख करोड़ से बढ़ाकर 5.94 लाख करोड़ कर दिया गया है। इसमें से 1.62 लाख करोड़ रुपए नए उपकरण, वायुयान, युद्धपोत आदि खरीदने के लिए पूंजीगत व्यय के लिए आरक्षित कर दिया है। 35 हजार करोड नेट जीरो लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवंटित किए गए हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए 13.7 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है जो कुल जीडीपी का मात्र 3.3 प्रतिशत है। इसमें रेलवे के लिए 2.4 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं। राज्यों द्वारा 50 वर्ष की अवधि के लिए ब्याजमुक्त कर्ज लेने की सीमा एक वर्ष के लिए और बढ़ा दी गई है। मिशन ग्रीन पर 35 हजार करोड एवं हाइड्रोजन मिशन पर 19.7 हजार करोड का आवंटन किया गया है। सरकार ‘मेक इन इंडिया’ को लगता है भूल ही गई है। कहीं बजट में मेक इन इंडिया’ पर कोई बात नहीं की गई।

वित्तमंत्री महोदया द्वारा प्रस्तुत बजट में राजकोषिय घाटे को वर्ष 2023-24 के लिए 5.9 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है, जबकि वर्ष 2022-23 का संशोधित राजकोषीय घाटा 6.4 प्रतिशत अनुमानित है। वित्तमंत्री राजकोषीय घाटे को वर्ष 2025-26 तक 4.5 प्रतिशत तक सीमित करने को कह रही हैं, जो एफआरबीएम एक्ट द्वारा निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक है। अनुत्पादक सार्वजानिक व्यय को कम करने एवं अति धनी वर्ग से वेल्थ कर और संपत्ति कर के माध्यम से अतिरिक्त संसाधन जुटाने जैसे उपायों के द्वारा सरकार राजकोषीय प्रबंधन को और कुशल बना सकती थी, लेकिन लगता है कि आगामी चुनावों के मद्देनजर सरकार ऐसे कदम उठाने से बच रही है। सरकार को राजकोषीय प्रबंधन के लक्ष्य हासिल करने के लिए कुछ आवश्यक एवं कठोर उपाय करने की आवश्यकता है अन्यथा बजट से आम जनता को महंगाई की मार झेलने के लिए तैयार रहना होगा।
(लेखक चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं)


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