Sunday, April 5, 2026
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कोल्हुओं पर धड़ल्ले से जलाई जा रही पॉलीथिन

  • पॉलीथिन के जलने से फैल रहा भारी प्रदूषण

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम/लावड़: एनजीटी ने प्लॉस्टिक या अन्य किसी भी प्रकार के कचरे को जलाने पर पाबंदी लगा रखी है। इसके बावजूद जनपद में खुलेआम प्लॉस्टिक कचरा बड़े पैमाने पर कोल्हुओं में धड़ल्ले से जलाया जा रहा है। जिले में गन्ना कोल्हुओं की भरमार है। इनमें से बड़ी संख्या में कोल्हुओं पर प्लॉस्टिक कचरा जलाया जाता है।

क्षेत्र के कोल्हुओं पर ईधन के रूप में प्लॉस्टिक व पॉलीथिन का प्रयोग खुलेआम किया जा रहा है। जिससे निकला धुआं पर्यावरण का दूषित कर रहा है। लोगों के मुताबिक धुएं के चलते गांव में रहना मुश्किल हो रहा है। जिले में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। कोल्हुओं एवं अन्य औद्योगिक इकाइयों में प्लॉस्टिक कचरा फूंका जाता है।

उद्योगों से निकलने वाले धुएं के कारण प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। जिले के लोग खुद ही हवा को जहरीली कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर प्लॉस्टिक कचरा कोल्हुओं में झोंका जा रहा है। खुलेआम इसका प्रयोग किया जा रहा है, लेकिन कोई इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। ये स्थिति तब है, जब जिला वायु प्रदूषण के मामले बेहद खराब स्थिति में है।

देहात क्षेत्र में बिना परमिशन के कोल्हू और क्रेशर पर बिना अनुमति संचालित कर दिए गए हैं, लेकिन इन कोल्हुओं पर सबसे बड़ी समस्या पॉलीथिन जलने से प्रदूषण को बढ़ावा मिलना है। कोल्हुओं पर पॉलीथिन जलने के कारण जहां भारी प्रदूषण बढ़ रहा है। वहीं, मानव जीवन पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है।

कोविड-19 के समय में बेहद सतर्कता बरती जा रही है, लेकिन देहात क्षेत्र के कोल्हुओं पर नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। हालांकि प्रदूषण विभाग इन पर नकेल कसने के लिए पूरी कार्रवाई की तैयारी भी कर रहा है, लेकिन सत्ता के रसूख के चलते यह भी विभाग कार्रवाई करने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर देता है। लावड़ क्षेत्र के खरदौनी, बिसौला, समौली गांव के सामने, जलालपुर समेत आधा दर्जन गांव ऐसे है।

जो सीजन शुरू होने से पूर्व यहां कोल्हुओं का संचालन शुरू हो गया है। लगभग 50 से अधिक कोल्हू संचालित हो रहे हैं। इन कोल्हुओं पर पन्नी जलाने का कार्य धड़ल्ले से चल रहा है। प्रदूषण विभाग के अधिकारी शिकायतों पर शिकायते मिलने के बाद इन पर कार्रवाई करने की कई बार तैयारी कर चुके हैं, लेकिन हर बार सत्ता का दबाव पड़ने के कारण ये कार्रवाई रुक जाती है। जिसके चलते प्रदूषण के मानक भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में मानव जीवन पर भी इस प्रदूषण का प्रभाव पड़ रहा है और लोेग बीमारी का धीरे-धीरे शिकार हो रहे हैं।

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पॉलीथीन के जलने से निकलती है विषैली गैस

पॉलीथिन कचरे के जलने से विषैली गैस निकलती है। पॉलीथिन जलने से कार्बन मोनो आक्साइड, कार्बनडाई आक्साइड गैस निकलती हैं। ये सभी प्रदूषक गैसें हैं। इनका शरीर पर घातक असर पड़ता है। इन सभी गैंसों से श्वांस एवं त्वचा से संबंधित रोग पैदा होते हैं। कार्बन मोनो आॅक्साइड शरीर में जाकर रक्त में आक्सीजन को कम कर देती है। इससे मृत्यु तक संभव है।

एनजीटी ने प्लॉस्टिक और रबर जलाने पर लगाया प्रतिबंध

एनजीटी की ओर से वर्ष 2013 में प्लॉस्टिक, रबर या ऐसे सामान को खुले में अनियमित रूप से जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। एनजीटी की इस रोक के बाद ही शहरों में कूड़ा जलाने पर रोक लगी थी। इससे पहले शहरी निकाय कूड़े को सड़क किनारे ही जला देते थे, लेकिन देहात इलाकों में कोल्हू संचालक खुलेआम प्लॉस्टिक और पॉलीथिन जलाकर भारी वायु प्रदूषण फैला रहे हैं।

बीमारियों का कारण बन रहा धुआं

प्लॉस्टिक और रबर जलाने से निकलने वाला धुआं जानलेवा बीमारियों की वजह बन रहा है। प्लॉस्टिक एवं रबर जलाने पर डाईआक्सिंस एवं फ्यूरॉन्स रसायन, कार्बन कण, बैंजीन, आर्सेनिक, क्रोमियम आदि पर्यावरण में फैल रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इनसे मानव और अन्य जीवों के डीएनए खराब हो रहे हैं। ये धुआं कैंसर, मानसिक रोग, प्रजनन क्षमता क्षीण, अस्थमा और सांस की अन्य बीमारियों का कारण बन रहा है।

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कोल्हुओं पर पॉलीथिन जलाने की शिकायत मिल रही है। विभागीय कर्मचारियों को इनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए निर्देश दे दिए गए है। जल्द ही ऐसे कोल्हू संचालकों पर कार्रवाई होगी। नियम के विरुद्ध कोई कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
-योगेंद्र कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी

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