Sunday, February 15, 2026
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सील तोड़कर बोम्बे मॉल में चल रही व्यापारिक गतिविधियां

  • बड़ा सवाल: कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने कैसे टूटने दी सील

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कैंट बोर्ड के सरकारी दस्तावेजों में बांबे मॉल पर सील लगी हैं, लेकिन मौके पर मॉल गुलजार हो गया हैं। व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले हैं। व्यापारिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। आखिर इसमें कौन संरक्षण दे रहा हैं? जब हाईकोर्ट के आदेश पर सील लगी है तो फिर कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने सील को कैसे टूटने दिया? इसमें सेटिंग-गेटिंग का खेल नजर आ रहा हैं। यदि सील तोड़ी गई है तो फिर कैंट के अधिकारी इसमें एफआईआर दर्ज क्यों नहीं करा रहे हैं? इसमें अधिकारी जवाबदेही से क्यों बच रहे हैं?

हाईकोर्ट के आदेश पर 2008 में बोम्बे मॉल पर सील लगा दी गई थी। यह सील अवैध निर्माण करने पर की गई थी। यही नहीं, हाईकोर्ट ने प्रथम, द्वितीय और तीसरी मंजिल को गिराने के भी आदेश दिये थे। साथ में सील लगाने के बाद भी आदेश दिये थे। इसी बीच कुछ व्यापारी हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गए थे। हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि प्रतिष्ठान सील होने के बाद बोम्बे माल में बंद सामान नष्ट हो जाएगा।

सामान निकालने के लिए सील खोलने की मांग की गई थी। तब हाईकोर्ट ने व्यापारियों का सामान निकलवाने के लिए सील खोलने के आदेश हाईकोर्ट ने दिये थे, साथ ही यह भी कहा था कि व्यापारियों का सामान निकलने के बाद बोम्बे मॉल पर पुन: सील लगा दी जाए। सील तो लगाई गयी, लेकिन अब सील तोड़ दी गई। प्रतिष्ठान भी खुल गए। बाजार में व्यापारिक गतिविधियां भी संचालित होने लगी। यह स्थल कैंट बोर्ड से मात्र चार सौ मीटर की दूरी पर स्थित हैं। कैंट के तमाम अधिकारी हर रोज इसके आगे से निकलते रहते हैं, मगर इसमें सील तोड़ने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं करायी गयी। आखिर क्यों? इसमें कोई न कोई झोल दिखाई दे रहा हैं।

कैंट के अधिकारी जानते हुए भी अनजान कैसे बने हुए हैं? यह बड़ा सवाल हैं। 2020 में सीईओ नवेन्द्रनाथ ने चार्ज संभाला, तभी से बोम्बे मॉल की सील तोड़कर व्यापारिक गतिविधियां संचालित की जाने लगी। इस पर सीईओ के स्तर पर भी कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यह भी सवालों के घेरे में आ गया हैं। कैंट में एक बिल्डिंग गिराने के दौरान बड़ा हादसा भी हो चुका हैं, फिर भी कैंट के अधिकारी बाज नहीं आ रहे हैं।

कुर्सी क्यों नहीं छोड़ रहे सीईओ?

कैंट सीईओ नवेन्द्र नाथ का डायरेक्टर पद पर पुना में तबादला हो चुका हैं, लेकिन वह सीईओ की कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। कुर्सी पर चिपके हुए हैं। आखिर इस सीट को सीईओ क्यों छोड़ना नहीं चाहते, जबकि आदेश में स्पष्ट लिखा है कि सीईओ नवेन्द्र नाथ का प्रोमेशन कर दिया गया है तथा इसका अतिरिक्त कार्यभार हरेन्द्र चौधरी को दिया जाए।

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आदेश स्पष्ट है, फिर भी कार्यभार नहीं छोड़ रहे हैं। कूड़ा कलेक्शन के मामले में घोटाला सामने आ चुका हैं। इसकी जांच पड़ताल होगी। सीईओ नवेन्द्र नाथ के इस कुर्सी पर रहते हुए कैसे निष्पक्ष जांच संभव हो सकती हैं? इसको लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। सर्वे के पांच करोड़ रुपये छावनी बोर्ड में आये हैं, अभी उनको खर्च कैसे किया जाए, इस पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं।

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