जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी से जुड़े विवाद पर आज कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही है। इससे पहले 9 जनवरी को यह सुनवाई नहीं हो सकी थी, क्योंकि अदालत परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई थी, जिसके चलते कोर्ट को सुनवाई स्थगित करनी पड़ी थी।
ईडी ने कोर्ट में क्या कहा
9 जनवरी को दाखिल अपनी याचिका में ईडी ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम में राज्य के सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व की सीधी भूमिका रही और पुलिस बल का दुरुपयोग किया गया। एजेंसी ने हाईकोर्ट से मांग की है कि मामले में सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने और मुख्यमंत्री सहित सभी कथित रूप से संलिप्त लोगों की भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया जाए।
ईडी ने यह भी कहा कि जब किसी राज्य में शक्तिशाली और प्रभावशाली लोग संज्ञेय अपराधों में शामिल हों, तो जांच सीबीआई को सौंपना जरूरी हो जाता है। एजेंसी ने अदालत से यह आग्रह भी किया है कि सर्च के दौरान कथित रूप से जबरन ले जाए गए सभी डिजिटल उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, स्टोरेज मीडिया और दस्तावेजों को तत्काल जब्त कर सील किया जाए, उनका फोरेंसिक संरक्षण किया जाए और उन्हें ईडी की कानूनी हिरासत में लौटाया जाए।
टीएमसी की याचिका भी कोर्ट में
इस मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भी कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। टीएमसी ने I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) पर ईडी की छापेमारी को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। टीएमसी का कहना है कि वह बंगाल में एसआईआर के खिलाफ आवाज उठा रही है और विरोध कर रही है, इसी कारण राजनीतिक बदले की भावना से ईडी ने पार्टी के पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी ऑफिस (I-PAC) और उसके को-फाउंडर के घर पर तलाशी ली। पार्टी ने यह आरोप भी लगाया है कि ईडी ने गैर-कानूनी तरीके से गोपनीय डेटा जब्त किया है।
क्या है पूरा मामला
गुरुवार, 8 जनवरी को ईडी ने कथित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में I-PAC के सॉल्ट लेक स्थित ऑफिस और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी।
ईडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस की मदद से जैन के आवास में जबरन दाखिल हुईं और अधिकारियों के मना करने के बावजूद अहम डिजिटल सबूत और दस्तावेज अपने साथ ले गईं। एजेंसी के मुताबिक, इसी वजह से तलाशी अभियान विफल हो गया और कोई भी जब्ती नहीं हो सकी।

