Wednesday, May 13, 2026
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Makar Sankranti 2026: क्या आज खा सकते हैं खिचड़ी? एकादशी और मकर संक्रांति का प्रभाव

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। आज, 14 जनवरी 2026, बुधवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, यह माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जिसे षटतिला एकादशी के नाम से मनाया जाता है। इस दिन एक विशेष संयोग बन रहा है, क्योंकि सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिसे मकर संक्रांति कहा जाता है। सूर्य का मकर राशि में गोचर आज दोपहर 3:13 बजे होगा।

जहां एक ओर एकादशी के व्रत में चावल का सेवन निषिद्ध बताया गया है, वहीं मकर संक्रांति के पर्व पर खिचड़ी बनाने और खाने की परंपरा है। इस धार्मिक स्थिति में लोग संकोच कर रहे हैं कि आज के दिन चावल या खिचड़ी का सेवन और दान करना उचित होगा या नहीं।

एकादशी पर चावल और खिचड़ी से जुड़े नियम

एकादशी व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित होता है, और यह दिन उपवास और साधना का होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन अन्न का सेवन वर्जित होता है, विशेष रूप से चावल का। कई पुराण कथाओं और प्रसिद्ध विद्वानों के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाने से व्रत का पुण्य नष्ट हो जाता है और व्रति को दोष लग सकता है।

इसी कारण, 14 जनवरी 2026 को चावल या चावल से बनी खिचड़ी का सेवन और दान निषिद्ध माना गया है। एकादशी के दिन विशेष रूप से अन्न का त्याग कर, उपवास या फलाहार करने का महत्व होता है, ताकि पुण्य की प्राप्ति हो सके और व्रत का पूरा लाभ मिल सके।

मकर संक्रांति और खिचड़ी का धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति का पर्व विशेष रूप से कृषि और मौसम के बदलाव से जुड़ा होता है, और इसे कई स्थानों पर खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन चावल और दाल से बनी खिचड़ी का सेवन और दान अत्यंत शुभ माना जाता है। मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ मनाया जाता है, जो नई शुरुआत, समृद्धि, और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है।

खिचड़ी का सेवन इस दिन विशेष रूप से इसलिए किया जाता है क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती है और इसे एक तरह से धरती की नई फसल का प्रतीक भी माना जाता है। खिचड़ी को ग्रह शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है।

खिचड़ी आज खा सकते हैं या नही?

मकर संक्रांति को लेकर तारीख का कन्फ्यूजन जरूर है, लेकिन असल में 14 और 15 जनवरी दोनों ही दिन यह पर्व मनाया जा सकता है। जो लोग गुरुवार या एकादशी के नियम मानते हैं वे 14 जनवरी को तय समय के बाद पूजा-पाठ और खिचड़ी का दान-सेवन कर सकते हैं, जबकि बाकी लोग 15 जनवरी को भी पूरे विधि-विधान से संक्रांति मना सकते हैं।

23 साल बाद बना विशेष संयोग

शास्त्रों के अनुसार, इस बार मकर संक्रांति और एकादशी का संयोग 23 साल बाद बन रहा है; इससे पहले यह संयोग साल 2003 में आया था। इस खास अवसर पर एकादशी होने के कारण भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा करने से विशेष पुण्य और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

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