नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। हिंदू धर्म में सभी त्योहारो को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है, इनमें से ही एक है महाशिवरात्रि पर्व। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। इसी दिन माता पार्वती और शिव जी का विवाह हुआ था। इस दिन शिव जी की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई शिव साधना जीवन के संकटों को दूर करती है और मन को शांंति प्रदान करती है। महाशिवरात्रि पर चार प्रहर में शिवलिंग पर दूध, दही, गंगाजल, घी जैसी विभिन्न सामग्री से अभिषेक करने से विशेष लाभ प्राप्त किया जा सकता है। शिव जी का स्वरूप हर प्रहर में भिन्न होता है। इसलिए, यदि हम भोलेनाथ के स्वरूप के अनुसार उनका अभिषेक करें और उसी अनुसार मंत्रों का जाप करें, तो महादेव की अनंत कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
चार प्रहर की पूजा का समय
महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा के लिए निम्नलिखित मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं-
प्रथम प्रहर पूजा का समय: सायं 06:19 बजे से रात्रि 09:26 बजे तक
द्वितीय प्रहर पूजा का समय: रात्रि 09:26 बजे से मध्यरात्रि 12:34 बजे तक
तृतीय प्रहर पूजा का समय: मध्यरात्रि 12:34 बजे से 27 फरवरी , प्रातः03:41 बजे तक
चतुर्थ प्रहर पूजा का समय: 27 फरवरी , प्रातः03:41 बजे से प्रातः 06:48 बजे तक
चार प्रहर की पूजा विधि
महाशिवरात्रि के अवसर पर चार प्रहर में भगवान शिव की पूजा विधि इस प्रकार है:
- प्रथम प्रहर में शिवजी के ईशान स्वरूप का अभिषेक दूध से करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- द्वितीय प्रहर में यदि भोलेनाथ की पूजा अघोर रूप में की जाए, तो इसके विशेष फल प्राप्त होते हैं। इस स्वरूप का अभिषेक दही से करना चाहिए।
- तृतीय प्रहर में शिव के वामदेव स्वरूप की पूजा करनी चाहिए, और इस समय भगवान का घी से अभिषेक करना चाहिए।
- चौथे प्रहर में सद्योजात स्वरूप में महादेव का अभिषेक शहद से करना चाहिए।
चार प्रहर की पूजा में मंत्र जाप
- प्रथम प्रहर का मंत्र- ‘ह्रीं ईशानाय नमः’
- दूसरे प्रहर मंत्र- ‘ह्रीं अघोराय नम:’
- तीसरे प्रहर मंत्र- ‘ह्रीं वामदेवाय नमः’
- चौथे प्रहर मंत्र- ‘ह्रीं सद्योजाताय नमः

