जनवाणी ब्यूरो
नई दिल्ली: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती, बेटे तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ जमीन के बदले नौकरी घोटाले के मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश भी दिया है।
41 लोगों के खिलाफ आरोप तय
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि पूर्व रेल मंत्री लालू यादव ने अपने पद का दुरुपयोग किया और इस दौरान उन्होंने आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया। यादव परिवार ने रेल अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों के साथ मिलकर जमीनें हासिल की। इस मामले में अदालत ने 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए, जबकि 52 लोगों को बरी कर दिया, जिनमें कुछ रेल अधिकारी भी शामिल हैं। सीबीआई की चार्जशीट में नामित 103 आरोपियों में से पांच की मृत्यु हो चुकी है।
अधिवक्ता अजाज अहमद ने बताया, “सीबीआई अदालत ने लालू प्रसाद यादव, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और हेमा यादव के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 120B और 13 के तहत आरोप तय किए हैं। इन आरोपों की सुनवाई 29 जनवरी को की जाएगी।”
आरोप तय करने का दिया आदेश
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को आरोप तय करने का आदेश दिया है। इससे पहले, 19 दिसंबर को हुई सुनवाई में विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा था कि आरोप तय करने से संबंधित आदेश 9 जनवरी को सुबह 10:30 बजे सुनाए जाएंगे। इससे पहले, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत में एक सत्यापन रिपोर्ट दाखिल करते हुए बताया था कि चार्जशीट में नामित 103 आरोपियों में से पांच की मृत्यु हो चुकी है।
तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
सीबीआई ने इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र (जबलपुर) में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियां नियमों को नजरअंदाज करके की गईं।
सीबीआई के अनुसार, ये नौकरियां उन लोगों को दी गईं जिन्होंने लालू यादव के परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम पर जमीन उपहार में दी या ट्रांसफर की। एजेंसी का दावा है कि इन सौदों में बेनामी संपत्तियां भी शामिल थीं, जो कि आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार की श्रेणी में आती हैं।

