Friday, March 6, 2026
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भाकियू ने मारी पलटी, महिला दरोगा के समर्थन में आए चौहान

  • भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा प्रेमवीर राणा हो बर्खास्त

जनवाणी ब्यूरो |

शामली: कैराना प्रकरण पर भारतीय किसान यूनियन ने पलटी मार दी है। एक दिन पहले ही भाकियू के प्रदेश प्रवक्ता व अन्य भाकियू पदाधिकारियों ने भाकियू खुद और भाकियू द्वारा जातिवाद की राजनीति नहीं करने का दावा किया। वहीं भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मैनपाल चौहान महिला दरोगा अंजू गुज्जर के समर्थन में आ गए। उन्होंने कोतवाल प्रेमवीर राणा को बर्खास्त करने की मांग की। साथ ही कहा कि एक सप्ताह में यदि निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई नहीं हुई तो हम आंदोलन को मजबूर होंगे।

भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मैनपाल चौहान मंगलवार को नगर पालिका परिषद सभागार में प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कैराना कोतवाली में तैनात महिला दरोगा अंजू गुज्जर ने जिस प्रकार अपने सीनियर अधिकारी कोतवाली प्रेमवीर राणा पर आरोप लगाए हैं उससे तो सरकारी विभाग में महिलाओं का कार्य करना संभव नहीं है। बेटी बचाव बेटी बढाओ का नारा देनी वाली सरकार में यदि ऐसा होगा तो बेटियां नौकरी करते वक्त कहां सुरक्षित रह पाएगी।

ऐसे कोतवाल को तो बर्खास्त करना चाहिए था। मैनपाल चौहान ने कहा कि मैं भाकियू से इतर भी उस बेटी की लड़ाई लडूंगा जिसे शोषण से तंग आकर और अधिकारियों द्वारा न्याय नहीं मिलने पर अपनी वीडियो वायरल करने को मजबूर होना पड़ा। कुछ अधिकारी इस प्रकरण को विधायक नाहिद से जोड़कर जातिये बता रहे है।

अधिकारी इस मामले में किसी राजनीतिक दबाव में न आए और निष्पक्ष जांच करें। मैनपाल चौहान ने कहा भाकियू ने साल 2014 में दलित बेटी के साथ हुई घटना में भी धरना-प्रदर्शन किया था। अब भी यदि अंजू गुज्जर को न्याय नहीं मिला तो एक सप्ताह बाद भी हम आंदोलन को मजबूर होंगे जिसका जिम्मदार प्रशासन होगा। उनके साथ भाकियू के सहारनपुर मंडल के मीडिया प्रभारी रविंद राणा व अन्य मौजूद रहे।

जातीय सीमाओं से दूर है भाकियू

सोमवार को ही भाकियू की एक बैठक महानगर अध्यक्ष योगेंद्र पंवार के कार्यालय पर हुई थी। जिसमें कैराना के महिला दरोगा प्रकरण को लेकर योगेंद्र पंवार ने कहा कहा था कि भाकियू जातिवाद की राजनीति नहीं करती। प्रदेश प्रवक्ता कुलदीप पंवार ने भी कहा था पुलिस को जातीय सीमाओं में बांधने की कुचेष्टा न की जाए। जिला उपाध्यक्ष संजीव राठी ने कहा कि इस प्रकरण को जातीय रूप न दिया जाए। उसके दूसरे दिन ही भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महिला दरोगा अंजू गुज्जर के समर्थन में आ गए और इंस्पेक्टर प्रेमवीर राणा को बर्खास्त करने की मांग करने लगे।

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