नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। हिंदू धर्म में दिवाली के छठे दिन बाद मनाया जाने वाला लोक आस्था का महापर्व छठ आज से प्रारंभ हो गया है। यह चार दिवसीय व्रत पर्व भगवान सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व में अस्त और उदय होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस वर्ष छठ महापर्व 25 अक्तूबर से 28 अक्तूबर तक मनाया जाएगा। पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य, और चौथे दिन उषा अर्घ्य के साथ व्रत का समापन होता है। 27 अक्तूबर को संध्या अर्घ्य का विशेष महत्व रहेगा। इस दिन व्रती सूर्यास्त के समय डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे, जबकि अगले दिन, 28 अक्तूबर को, उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा। यह पर्व न केवल सूर्योपासना का प्रतीक है, बल्कि संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना से जुड़ा हुआ है। छठ का व्रत अत्यंत कठोर माना जाता है, व्रती लगभग 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखते हैं और पूर्ण शुद्धता का पालन करते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और नेपाल के तराई क्षेत्रों में यह पर्व विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है।
तिथि
षष्ठी तिथि प्रारंभ- 27 अक्तूबर 2025 को सुबह 06 बजकर 04 मिनट पर
षष्ठी तिथि समाप्त- 28 अक्टूबर 2025 को सुबह 07 बजकर 59 मिनट पर
संध्या अर्घ्य का समय
छठ पूजा पर सबसे महत्वपूर्ण दिन तीसरा यानी संध्या अर्घ्य माना जाता है। इस दिन संध्या अर्घ्य का होता है। इस दिन व्रती घाट पर आकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। वैंदिक पंचांग के अनुसार 27 अक्तूबर को सूर्योदय प्रातः 06:30 मिनट और सूर्यास्त शाम 05:40 मिनट पर होगा। इस दिन व्रती और भक्त किसी पवित्र नदी या तालाब मे कमर तक पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
उगते सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व
छठ महापर्व का चौथा और आखिरी दिन कार्तिक माह की सप्तमी तिथि को होता है जिसमें इस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण का होता है। 28 अक्तूबर 2025 को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद ही 36 घंटे का व्रत समाप्त होता है। अर्घ्य देने के बाद व्रती प्रसाद का सेवन करके व्रत का पारण करती हैं।
पूजा विधि
छठ पूजा के लिए दो बड़े बांस की टोकरी लें, जिन्हें पथिया और सूप के नाम से जाना जाता है।
इसके साथ ही डगरी, पोनिया, ढाकन, कलश, पुखार, सरवा भी जरूर रख लें।
बांस की टोकरी में भगवान सूर्य देव को अर्पित करने वाला भोग रखा जाता है। जिनमें ठेकुआ, मखान, अक्षत, भुसवा, सुपारी, अंकुरी, गन्ना आदि चीजें शामिल हैं।
इसके अलावा टोकरी में पांच प्रकार के फल जैसे शरीफा, नारियल, केला, नाशपाती और डाभ (बड़ा वाला नींबू) रखा जाता है।
इसके साथ ही टोकरी में पंचमेर यानी पांच रंग की मिठाई रखी जाती है। जिन टोकरी में आप छठ पूजा के लिए प्रसाद रखा रहे हैं उन पर सिंदूर और पिठार जरूर लगा लें।
छठ के पहले दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है जिसे संध्या अर्घ्य के नाम से जाना जाता है।
इस दिन भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए बांस या पीतल की टोकरी या सूप का उपयोग करना चाहिए।

