- पूर्व लिपिकगण, अधिकृत अधिकारियों ने अभिलेखों में दर्ज नहीं किये हस्ताक्षर
- जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों को निगम एवं प्रदेश के जन्म रजिस्ट्रीकरण अभिलेख से किए जाते हैं सत्यापित
- पूर्व में कार्यरत 15 लिपिकगणों में चार की हो चुकी मृत्यु, चार हो चुके सेवानिवृत, सात निगम में वर्तमान में हैं कार्यरत
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम में कार्यरत कुछ अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिये शासनादेश एवं अधिकारियों के आदेश का पालन करना जरूरी नहीं हैं। एक ऐसा ही मामला निगम के स्वास्थ्य विभाग के जन्म-मृत्यु कार्यालय के विभाग में देखने को सामने आ रहा है। जिसमें एक तो पूर्व में लिपिकगण एवं अधिकृत अधिकारी के द्वारा बड़ी त्रुटि की गई,
लेकिन अब सत्यापण में भी लापरवाही बरती जा रही है। शायद ऐसे अधिकारी एवं कर्मचारी को प्रदेश की योगी सरकार के एक्शन का कोई डर या भय उनके मन में दिखाई नहीं देता या तो उनकी निगम के अधिकारियों से सेटिंग मजबूत है या फिर शासन में पकड़।
नगर निगम के जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र विभाग में आॅफलाइन जारी किए गये प्रमाण पत्रों में लिपिक एवं अधिकृत अधिकारी के द्वारा बड़ी त्रुटि की गई। जिसमें उनके द्वारा जारी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों के रिकॉर्ड पर हस्ताक्षर ही नहीं किये गए। उनकी गलती की सजा वह लोग पा रहे हैं, जिन्होंने आॅफलाइन जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी तो कराए, लेकिन अब उनका निगम में लिपिकगणों की हठधर्मिता के चलते सत्यापण नहीं हो पा रहा है।

जिस समय आॅफलाइन प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। उस समय के 15 लिपिकगणों में चार की मृत्यु हो चुकी है और चार सेवानिवृत हो चुके हैं। शेष सात लिपिकगण वर्तमान में निगम में ही कार्यरत हैं। मुख्य निर्माण लिपिक प्रदीप जोशी समेत जो सात लिपिक वर्तमान में हैं, वह भी अपने पूर्व के कार्यकाल के समय के जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों के सत्यापण पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी एवं अपर नगरायुक्त के आदेश के बाद भी निगम में कार्यरत लिपिक सत्यापण के लिये आने वाले जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं। जिसमें अब उनके द्वारा दूसरी बड़ी घोर लापरवाही बरती जा रही है। वर्तमान में नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. गजेंद्र सिंह से इस संबंध में जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र एक बहुत ही महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड माना जाता है।
पूर्व में यदि बिना लिपिक एवं अधिकृत अधिकारी के आॅफलाइन जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गये है तो वह अपने आप में बड़ी त्रुटि मानी जा सकती है, लेकिन 15 लिपिकों में चार लिपिकों की मृत्यु हो चुकी है। उनके द्वारा भी सत्यापण किया जाना संभव नहीं है, जो सेवानिवृत हो चुके हैं। उनके द्वारा जो लापरवाही की गई हैं। जांच के दौरान उन पर भविष्य में कार्रवाई हो सकती है,
लेकिन सबसे बड़ी लापरवाही तो जो वर्तमान में निगम में महत्वपूर्ण लिपिक के पद पर कार्यरत होने के बावजूद सत्यापण में सहयोग नहीं कर रहे हैं। जिसमें नगर स्वास्य अधिकारी एवं अपर नगरायुक्त प्रमोद कुमार के द्वारा लिखित में आदेश जारी करने के बाद भी जांच के लिए आने वाले आॅफलाइन जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों को सत्यापण नहीं किया जा रहा है।
वर्तमान में निगम में कार्यरत
- मुख्य निर्माण लिपिक प्रदीप जोशी
- नगेंद्र सिंह स्वास्थ्य विभाग (जन्म-मृत्यु)
- नरेश कुमार निर्माण विभाग
- सुनील सिंह गृहकर विभाग, शास्त्रीनगर जोन
- मुकेश कुमार गृहकर विभाग कंकरखेड़ा जोन
- संजय मोहन, लेखा विभाग
- दिनेश कुमार स्वास्थ्य विभाग (जन्म-मृत्यु)
ये हो चुके हैं सेवानिवृत
- लोकेश शर्मा
- ब्रह्मसिंह
- नकली सिंह
- दीपक विद्यार्थी
इनकी हो चुकी मृत्यु
- मोहम्मद हैदर
- राजेंद्र शर्मा
- पंडित हरिकृष्ण शर्मा
- धर्मपाल सिंह

