- आरटीओ दफ्तर में बेखौफ हुए दलाल! चल रहा लूट का महाखेल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरटीओ कार्यालयों में दलालों की मौजूदगी की शिकायतों और डग्गामार बसों के संचालन पर नाराजगी जाहिर करते हुए परिवहन मंत्री और विभागीय अधिकारियों से साफ साफ कहा था कि आरटीओ कार्यालयों को दलालों से मुक्त करें, यह लोग व्यवस्था में बाधक हैं।
लेकिन, मेरठ मंडल में मुख्यमंत्री के इस निर्देश का माखौल उड़ाया जा रहा है। इसका एक उदाहरण पिछले दिनों देखने को मिला था। आपको बता दें कि बीते पांच अगस्त को जिलाधिकारी दीपक मीणा के निर्देश पर एडीएम ब्रिजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में एक टीम ने आरटीओ दफ्तर पर अचानक छापेमारी की थी। इस दौरान कई दलाल पकड़े भी गए और कई मौके की नजाकत भांपते हुए भाग निकले।
डीएम की सख्ती भी बेअसर
अब सवाल उठता है कि जिस दफ्तर में दो दो आरटीओ बैठ रहे हों। साथ ही एआरटीओ और इनके नीचे कई इंस्पेक्टर काम करते हों तो वहां पर दलालों की जमघट कैसे और क्यों लग रहा है। इतना ही नहीं बकौल मीडिया रिपोर्ट की मानें तो डीएम ने इस बात को स्वीकार किया है कि आरटीओ दफ्तर में दलालों का बोलबाला है।
इस बात की शिकायत काफी पहले जिलाधिकारी कार्यालय को मिल रही थीं, इसलिए उन्होंने एक टीम का गठन कर औचक छापेमारी के लिए एडीएम को निर्देश दिया था। मजे की बात यह है कि इस छापेमारी में शिकायतें सच साबित हुईं और कई दलाल पकड़े भी गए। उधर, स्कूली वाहन पीले रंग के होने चाहिए, जो नहीं है।
दलालों पर कार्रवाई मगर जांच नहीं क्यों?
तुर्रा यह है कि आरटीओ दफ्तर में अरसे से छापेमारी चलती रहती है और दलाल पकड़े जाते रहते हैं। फिर आरोपियों के विरुद्ध मामूली धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर उन्हें जेल भेज दिया जाता है। कुछ दिन बाद वे फिर जमानत पर रिहा होकर अपने धंधे में लग जाते हैं और यही आरटीओ विभाग के अफसर फिर उन्हीं दलालों को अपना आशीर्वाद देकर खेल आगे बढ़ाते रहते हैं।
अब यहां कई बड़े सवाल और भी हैं, जब दलाल पकड़े गए तो आरटीओ विभाग के अफसरों पर क्या कार्रवाई की गई। दलालों का सिंडीकेट विभाग में किन-किन अफसरों से जुड़ा हुआ है, इस पूरे खेल में और कौन-कौन से अधिकारी व अन्य कर्मी शामिल हैं। इस पूरे खेल की जांच पड़ताल आखिर क्यों नहीं होती है।
दलालों पर कार्रवाई पर जांच नहीं
आखिर वह कौन-सी वजह है आरटीओ अफसरों की मेहरबानी पाने में ये दलाल बार बार कामयाब रहते हैं। एआरटीओ की मेहरबानी दलालों पर क्यों रहती है। आम जनता विभाग से जो काम महीने दर महीने नहीं करवा पाती है उसी काम को दलाल चंद घंटों में कैसे करवा लेते हैं।
जबकि कोई काम करवाने में आरटीओ, एआरटीओ और इंस्पेक्टर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहती है। यही अधिकारी आम जनता की फाइल पर सिग्नेचर करने के लिए 20 बहाने और कमियां गिनाता है मगर, दलाल के माध्यम से पहुंचते ही फाइल पर सिग्नेचर फौरन उन्ही अफसरों का कैसे हो जाता है।