- माफिया से सेटिंग गेटिंग कर करोड़ों की टैक्स चोरी करा रहे परिवहन अधिकारी, पीले कलर के होने चाहिए स्कूली वाहन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त आदेशों को तार-तार करके संभागीय परिवहन कार्यालय के अधिकारी परिवहन माफिया से मजबूत रिश्ते बनाए हैं। अधिकारी अपने स्वार्थ के चलते सीएनजी किट लगी प्राइवेट वैनों में स्कूलों के हजारों मासूम बच्चों को ले जाकर उनकी जान को खतरे में डाल रहे हैं। हद तो यह है कि जो स्कूल इस नेटवर्क से दूर रहना चाहता है, उनकी बसों और वैनों के चालान किए जाते हैं,
उन्हें जबरन सीज करके थानों या संभागीय परिवहन कार्यालय में खड़ा करा दिया जाता है। खास बात है कि यदि अवैध रूप से बच्चों को स्कूल से लाने ले जाने वाले वैन से कोई दुर्घटना हो जाती है तो वाहनों की बीमा कंपनियां किसी बच्चे या उसके अभिभावक को कोई क्लेम नहीं देंगी। यानी परिवहन विभाग के अधिकारियों के इस काले खेल के चलते अभिभावकों को दोहरी मार पड़ेगी।
जनवाणी द्वारा चलाई जा रही मुहिम के दूसरे दिन संभागीय परिवहन कार्यालय के कुछ अधिकारियों की परिवहन माफिया से सेटिंग करके अवैध रूप चल रही बसों और सीएनजी किट लगी स्कूली बच्चों को लाने ले जाने वाली प्राइवेट वैन की ग्राउंड जीरो पर रियेलिटी चेक किया। शहर के सबसे प्रतिष्ठित सोफिया गर्ल्स स्कूल की मासूम बच्चियों को सीएनजी किट लगी 100 प्राइवेट वैन में ले जाते हुए पाया गया। इनमें कुछ वैन वायु प्रदूषण फैलाती मिलीं, तो कई ध्वनि प्रदूषण भी फैलाती दिखाई दीं।
इन वैनों के ड्राइवर परिवहन विभाग के अधिकारियों की मेहरबानी से बिना किसी डर खौफ के वैनों को दौड़ाते दिखाई दिए। चालान और किसी अन्य कार्रवाई से बेफिक्र ड्राइवर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए दिखाई दिए। सोफिया स्कूल की सैकड़ों छात्राओं को प्राइवेट नंबर की सीएनजी किट लगी 100 ईको वैन और मारुति वैन में ले जाते हुए पाया गया। अधिकांश ईको वैन और मारुति वैन में 14 से 17 बच्चों को ले जाते हुए पाया गया। इनमें बड़ी संख्या में वैन की हालत खराब नजर आई।
किसी का साइलेंसर फट रहा है और वह ध्वनि प्रदूषण व वायु प्रदूषण फैलाती नजर आर्इं तो कुछ के साइलेंसर से काला धुआं बहुत अधिक निकलता दिखाई दिया, जिससे वायु प्रदूषण फैल रहा है। इन वाहनों में मासूम छात्राओं की जान जोखिम में डालने के पीछे की वजह परिवहन विभाग के अधिकारियों की परिवहन माफिया से सेटिंग मानी जा रही है। परिवहन माफिया ने संभागीय परिवहन कार्यालय के अधिकारियों से सेटिंग करके अवैध रूप से वाहनों का संचालन कराने का ठेका ले रखा है।
अवैध रूप से संचालित वैनों के नंबरों की सूची परिवहन माफिया ने भ्रष्ट अधिकारियों को दे रखी है। वे जब वाहनों की चेकिंग करते हैं तो पहले लिस्ट में नंबर चेक करते हैं, यदि लिस्ट में नंबर है तो उसे बिना किसी कार्रवाई का ससम्मान छोड़ दिया जाता है, लिस्ट में नंबर न होने वाले वाहन का तमाम कागज होने के बाद भी चालान ठोंक दिया जाता है, यानि कागज पूरे करके रोड पर वाहन चलाने वालों को जबरन अधिकारी परिवहन माफिया की शरण में भेजने का दबाव बनाते हैं।
संभागीय परिवहन कार्यालय के अधिकारियों की परिवहन माफिया की सेटिंग के चलते हजारों बच्चों की जान जोखिम में डाल रहे हैं, वहीं प्राइवेट नंबरों की वैन का संचालन कराकर विभाग को टैक्स, फिटनेस और परमिट आदि का हर वर्ष करोड़ों का चूना लगा रहे हैं। उधर, स्कूली वाहन पीले रंग के होने चाहिए, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है।

