Thursday, March 5, 2026
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कांग्रेसियों को है बड़ी आस, प्रियंका की रैली में जुटेगी भीड़

  • कैली में होने वाली महापंचायत के लिये कांग्रेसियों ने झोंकी ताकत

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कृषि कानून के खिलाफ 100 दिन से चले आ रहे ऐतिहासिक आंदोलन को देखते हुए राजनीतिक दलों ने अपनी जमीन तलाशनी शुरू कर दी है। मेरठ में लगभग राजनीतिक जमीन गंवा चुकी कांग्रेस को संजीवनी बूटी देने के लिये कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी आज दौराला के कैली गांव में किसान महापंचायत में भाग लेने आ रही है। जिला और शहर कांग्रेस कमेटी के लिये यह चुनौतियां होगी कि हाई प्रोफाइल महापंचायत को कैसे सफल बनाया जाए।

प्रियंका गांधी क्रांतिधरा पर दूसरी बार आ रही है। इससे पहले भीम आर्मी के संयोजक चन्द्रशेखर उर्फ रावण से मिलने आनंद अस्पताल आई थी। अब किसानों के 100 दिनों से चले आ रहे आंदोलन को राजनीतिक रंग देने के लिये प्रियंका गांधी का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जब से प्रियंका गांधी के हाथ में प्रदेश की जिम्मेदारी आई है तब से कांग्रेस का एक वर्ग उनको खुलकर सपोर्ट करने में लग गया है।

यही कारण था कि बिजनौर में किसान महापंचायत करने के बाद प्रियंका गांधी ने मेरठ आना स्वीकार किया। इसके पीछे एक कारण यह भी माना जा रहा है कि जिस तरह किसान आंदोलन को लेकर रालोद और आम आदमी पार्टी अपनी जमीन मजबूत करने में लगे हैं ऐसे में कांग्रेस ने भी भाजपा के गढ़ में महापंचायत का आयोजन कर ताकत का अहसान कराने की सोची है।

यह वक्त बताएगा कि कांग्रेस की यह रणनीति कितनी सफल होगी। दरअसल इस वक्त कांग्रेस के पास स्थानीय स्तर पर मजबूत संगठन न होने के कारण शहर में ऐसा संदेश नहीं जा रहा कि कांग्रेस की पावरफुल नेता प्रियंका गांधी मेरठ में आ रही है।

गुटबाजी और एक-दूसरे को शिकस्त देने में लगे कांग्रेसी नेताओं का दावा है कि महापंचायत के लिये 40 बसों और सौ कारों की व्यवस्था की गई है। अब यह देखना है कि रविवार को कैली में कांग्रेस किसान आंदोलन को किस हद तक भुना पाती है।

तैयारियों को दिया अंतिम रूप

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव प्रियंका गांधी की कैली में होने वाली जय जवान जय किसान, किसान महापंचायत की तैयारियों को जिलाध्यक्ष अवनीश काजला ने अंतिम रूप दिया गया। कांग्रेस प्रवक्ता हरिकिशन अम्बेडकर ने बताया कि आज दोपहर 12 बजे कैली में मोदी सरकार द्वारा किसानों पर थोपे गये काले कानूनों को वापस लेने की मांग करेंगी।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव जुबैर अहमद व रोहित गुर्जर ने तैयारियों को देखकर आवश्यक दिशा- निर्देश जारी किये। जिलाध्यक्ष अवनीश काजला ने कहा कि किसान विरोधी काले कानून मोदी सरकार के ताबूत में आखरी कील साबित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रियंका की महापंचायत को लेकर किसानों व आम जनों में बहुत उत्साह हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता हरिकिशन अम्बेडकर ने बताया कि महापंचायत में हजारों लोग शामिल होंगे। किसानों को लाने व ले जाने के लिये ब्लाक व न्याय पंचायत अध्यक्षों की जिम्मेदारियां तय की गई है। जिलाध्यक्ष अवनीश काजला, प्रवक्ता हरिकिशन अम्बेडकर, महेन्द शर्मा, डा. दिनेश मोहन शर्मा, मोहित सागवान, कपिल जैन, आशा राम, तरुण शर्मा, यूसुफ अन्सारी, शेर मोहम्मद, जुगनू कैली आदि ने भराला, कनौड़ा, रुहासा, दशरथपुर, लोइया, जमालपुर, सकौती, मटौर, नंगली आदि गांवों में महापंचायत के लिये जनसम्पर्क किया।

योजनाबद्ध तरीके से मेरठ में महापंचायत कर रही प्रियंका

कृषि कानूनों के खिलाफ कांग्रेस का अचानक वेस्ट यूपी में मुखर हो जाना मौके की नजाकत नहीं है बल्कि कांग्रेस लगभग तीस सालों से मेरठ में दरक गई जमीन को फिर से मजबूत करने के लिये प्रियंका गांधी एक दो नहीं पूरे 27 महापंचायत करने जा रही है। इसी कड़ी में कांग्रेस की महासचिव रविवार को दौराला के कैली गांव में आ रही है।

1990 से पहले मेरठ संसदीय सीट पर कांग्रेस का राज था और कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था। मोहसिना किदवई के दो बार सांसद बनने और अवतार सिंह भड़ाना के सांसद बनने के अलावा मेरठ से कांग्रेस का नाता खत्म होना शुरु हो गया था जो बाद में भाजपा, बसपा और जनता दल के हाथ में आ गया।

कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी के बार बार दौरों और खुद प्रियंका गांधी के एक बार मेरठ आने के बाद भी कांग्रेसियों में ऊर्जा नहीं भर पाई थी। अब कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन और किसानों का भाजपा के खिलाफ खुलकर सामने आता देख विपक्षी दलों ने इस आंदोलन को राजनीतिक रंग दे दिया है।

वेस्ट यूपी में कांग्रेस को उम्मीद जगने लगी है कि एंटी भाजपा माहौल को देखते हुए नाराज वोटरों को आकर्षित किया जा सकता है। इसको देखते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी सहारनपुर, शामली, बिजनौर और मथुरा के बाद अब कैली में महापंचायत करने जा रही है।

कांग्रेस का बिखरा हुआ संगठन महासचिव के सपनों को किस तरह पूरा करेगा यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन जिस तरह से कांग्रेस ने कृषि कानूनों के खिलाफ बने माहौल को भुनाने का अभियान शुरु किया है उसने अभी तक कांग्रेस को संजीवनी दी है। इस महापंचायत को लेकर जिला और शहर कांग्रेसी अपनी क्षमता से अधिक प्रयास करने में जुटे हुए हैं बाकी वक्त बताएगा।

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