
क्रोध इंसान का सबसे बड़ा अवगुण है। इंसान को क्रोध समाप्त कर देता है। क्रोध से लिया गया निर्णय हमेशा हानिकारक सिद्ध होता है। इसलिए क्रोध पर काबू पाना बहुत ही आवश्यक है। एक युवक बहुत ही गुस्सैल किस्म का था। वह छोटी छोटी बातो में भी अत्यधिक क्रोधित हो जाता था। उस युवक ने अपने यह परेशानी अपने पिताजी को शेयर की। उनके पिताजी ने कहा, जब भी गुस्सा आए तो दीवार पर एक कील ठोक देना। उस युवक ने अपने पिताजी के बात मान ली! जब भी गुस्सा आता था वह दीवार पर किल ठोक देता था। कुछ महीनों में उस युवक ने 50 किल ठोक दी। युवक परेशान हो गया था कि बार बार गुस्से के कारण मुझे कील ठोकने के लिए इतनी मेहनत करनी पड़ती है। इतनी मेहनत करने से तो अच्छा है कि मैं गुस्सा ही नहीं करूं, वह तो बहुत आसान है। कील ठोकने से परेशान होकर उसी युवक ने अपने गुस्से पर काबू पाना शुरू कर दिया। वह बहुत प्रसन्न हुआ और अपने पिताजी से कहा, पिताजी अब मैं अपने गुस्से पर काबू पा रहा हूं। पिताजी ने कहा, जितनी बार भी गुस्सा पर काबू करोगे तो उतनी बार कील निकाल देना। उस युवक ने फिर से अपने पिताजी का आज्ञापलन पालन किया। धीरे-धीरे वह अपने गुस्से पर काबू पाने में पूरी तरह सक्षम हो गया! उसने सभी किल दीवार से निकाल दी। उसके पिताजी ने उस दीवार का नक्शा बताते हुए कहा कि, ह्व बेटा इस दीवार को ध्यान से देखो। आपने किल तो निकाल दी है, लेकिन उस दीवार पर बहुत सारे छेद हुए हैं। यही समान रूप से मनुष्य के जीवन पर भी लागू होता है। जब भी हम गुस्सा करते है तो मनुष्य के मन भी इसी प्रकार से एक घाव बन जाता है! वह घाव छेद के समान है।


