- पराली जलाने पर कार्यवाही के विरोध में रोष व्याप्त
जनवाणी संवाददाता |
कैराना: पराली और फसलों के अवशेष जलाने पर अगर प्रशासन ने किसानों के खिलाफ कार्यवाही की तो उसके विरोध में तहसील कार्यालय में पात्ती एवं फसलों के अवशेष भर दिए जाएंगे।
पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी ने खेतों में फसलों के अवशेष तथा पराली जलाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। एनजीटी के आदेशों के अनुपालन के लिए प्रशासन द्वारा किसानों को खेतों में पराली व फसलों के अवशेष न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा हैं।
साथ ही, खेत में फसलों के अवशेष जलाने पर अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। इसको लेकर मंगलवार को किसान नेता राजन जावला के नेतृत्व में किसानों ने तहसील में सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
इस दौरान तहसीलदार प्रवीण कुमार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञान में बताया गया कि प्रदेश में गन्ने की पत्ती तथा धान की पराली जलाने पर प्रशासन किसानों पर मुकदमें लिखकर शोषण कर रहा है। मनमाने तरीके से अवैध वसूली की जा रही है।
इसलिए सरकार को ऐसे काले कानून को तत्काल प्रभाव से निरस्त करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो किसान तहसीलों में पत्ती भरने पर मजबूर होंगे जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। ज्ञापन में कहा गया कि प्रशासन द्वारा किसानों को फसलों के अवशेष प्रबंधन के लिए यंत्र उपलब्ध नहीं कराए जा रहें।
राज्य सरकार किसानों के साथ दोहरी नीति अपना रही हैं। अगर प्रशासन द्वारा किसानों के खिलाफ कार्यवाही की जाती हैं तो वें तहसीलो व थानों में पत्ती भर देंगे। इस दौरान जहांगीर, बलकार सिंह, नसीम, बलवंत सिंह, विक्की, हरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।

